
lucknow | बिजली इन्जीनियरों ने उत्तर प्रदेश सरकार के बजट को निराशाजनक करार दिया है। ऑल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि वर्ष 2018 के बजट में ऊर्जा क्षेत्र के लिए समुचित प्राविधान नहीं किए गए हैं। बिजली इन्जीनियरों का कहना है कि बजट में 77000 करोड़ के घाटे में डूबी बिजली वितरण कंपनियों के लिए न कोई राहत दी गयी है और न ही कोई उल्लेख किया गया है। फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि प्रदेश के डेढ़ करोड़ घरों तक बिजली पहुंचाने की सौभाग्य योजना की बजट में चर्चा मात्र की गयी है। इसे फलीभूत करने हेतु संसाधन खासकर मानव संसाधन कैसे बढ़ाया जायेगा, इस पर बजट में उल्लेख नहीं किया गया है।
इसी तरह बिजली उत्पादन बढ़ाने व अतिरिक्त बिजली खरीदने पर आने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति के बारे में भी कुछ स्पष्ट नहीं है। बिजली की जरूरत के अनुपात में पारेषण और वितरण के नेटवर्क को सुदृढ़ करने हेतु लगभग 40 से 50 हजार करोड़ रुपए का व्यय होगा, जिसका बजट में कोई उल्लेख नहीं है।
शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि बिजली सेक्टर में प्रदेश की सबसे बड़ी चुनौती लाइन हानियों को 15 फीसदी से नीचे लाने की है। प्रदेश में आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मीटर के बिजली कनेक्शन चल रहे हैं, जिससे बिजली की खपत पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाता है। ऐसे में यह जरूरी होगा कि सबको 24 घंटे बिजली देने के पहले शत प्रतिशत मीटरिंग सुनिश्चित की जाए। इसके लिए बजट में क्या प्राविधान किया गया है स्पष्ट नहीं है।
इसी तरह बिजली चोरी रोकने के लिए विजिलेंस के लिए 10 करोड़, 11 केवी फीडरों के कैपीसीटर बैंक के लिए मात्र 75 करोड़ रु आवंटित करना हास्यास्पद है। बजट में कुल 29883 करोड़ रुपए ऊर्जा क्षेत्र के लिए दिया गया है, जो चार लाख करोड़ रुपए से अधिक के बजट के 07 फीसदी से भी कम है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह धनराशि किन किन कार्यों हेतु दी गयी है।
शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि पर्यावरण के नए मापदण्डों के अनुसार 25 साल से अधिक पुराने ताप बिजली घरों में फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन प्रणाली लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। अन्यथा इन बिजली घरों को बंद करना पड़ेगा। प्रदेश के सभी पुराने बिजली घरों को पर्यावरण के इन माप दडों का पालन करना होगा, जिस पर प्रति मेगावाट एक करोड़ रुपए से अधिक का खर्च आएगा। इन बिजली घरों को बंद होने से बचाने के लिए एफ जीडीएस प्लांट लगाने हेतु बजट में कोई भी प्राविधान नहीं किया गया है।
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