विद्युत् कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली निजीकरण के खिलाफ दी आन्दोलन की चेतावनी


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 lucknow | विद्युत् कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पाॅवर कारपोरेशन प्रबंधन को बिजली आपूर्ति के निजीकरण के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है। संघर्ष समिति ने बुधवार को बैठक कर कहा कि यदि सात जनपदों की बिजली आपूर्ति के निजीकरण के टेण्डर 17 फरवरी तक वापस न लिए गए तो प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के बिजली कर्मचारी और अभियन्ता आन्दोलन शुरू कर देंगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि ग्रेटर नोयडा और आगरा में निजीकरण के प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुए हैं। ऐसे में सात और जनपदों का निजीकरण करने के बजाय पहले नोयडा और आगरा के निजीकरण की समीक्षा की जानी चाहिए। समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला करने हेतु शक्ति भवन में बड़े पैमाने पर कन्सल्टैंट नियुक्त किये गए हैं।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने विद्युत् वितरण के सात जिलों उरई ,इटावा ,कन्नौज ,रायबरेली ,सहारनपुर ,बलिया और मऊ के लिए एकीकृत सेवा प्रदाता के टेण्डर जारी कर दिए हैं, जिसके अनुसार मार्च 2018 तक इन जिलों की बिजली व्यवस्था निजी कंपनियों को सौंप दी जाएगी। शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि इन जिलों में बिजली कनेक्शन देने, मीटर लगाने, बिजली बिल देने, बिजली राजस्व वसूलने और यहां तक की बिजली बिलों में संशोधन करने का पूरा कार्य करेगी। निजी कंपनी को इन सब कार्यों को करने हेतु सहूलियत देने के लिए बिजली नेटवर्क और सब स्टेशन का मेंटेनेंस करने का कार्य पाॅवर कार्पोरेशन करेगा। अर्थात अनुरक्षण का खर्च पाॅवर कार्पोरेशन उठाएगा और इस नेटवर्क के सहारे पैसा कमाने का काम निजी कंपनियां करेंगी।


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