
लखनऊ, । प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान बड़ा मुद्दा बनी बिजली के मामले में नवगठित सरकार बेहद सक्रिय हो गई है। अपना कार्यभार संभालने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों के पेंच कसना शुरू कर दिए हैं। इसके तहत 24 घण्टे बिजली सप्लाई की कार्ययोजना को लेकर 23 मार्च तक रिपोर्ट मांगी गयी है। प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल नई सरकार के एजेण्डा का पालन करने में जुट गए हैं। तय रोस्टर के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर जिम्मेदार अफसरों पर गाज गिरना भी तय माना जा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घण्टे के भीतर ट्रांसफार्मर बदलने के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही बिजली महकमें के अधिकारियांे को करंट लग गया है। अखिलेश यादव सरकार में मलाई काटने वाले ये अधिकारी अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निशाने पर हैं। खास बात है कि यह वही अधिकारी हैं, जो अखिलेशराज में शहरों में 24 घण्टे बिजली मुहैया कराने का दावा करते थे।
माना जा रहा है कि अब इन अधिकारियों को गलत बयानबाजी की स्थिति में नई सरकार में कोपभाजन का शिकार बनना पड़ सकता है। इनमें उत्तर प्रदेश पाॅवर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के एमडी ए.पी. मिश्रा प्रमुख रूप से हैं। बताया जा रहा है कि मिश्रा की फाइल तलब की गई है। वह पूर्व मुख्यंत्री अखिलेश यादव के बेहर करीबी अफसरों में गिने जाते थे। यही वजह थी कि रिटायरमेन्ट के बाद वह तीन बार एक्सटेंशन पा चुके हैं। इस बार चुनावी माहौल में आचार संहिता लगने से ठीक पहले उन्हें एक्सटेंशन दिया गया था। मिश्रा 31 जुलाई 2012 से अब तक अपने पद पर काबिज हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर किताब लिखने के कारण भी सुर्खियों में आये थे। इससे पहले मायावती सरकार में भी वह सत्ता के करीबी रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल के कारण शासन के प्रिय बने रहे। अब सत्ता बदलने पर योगी सरकार ऐसे अधिकारियों की कुण्डली खंगालने में जुट गयी है। देखा जाए तो चुनाव में बिजली को लेकर खूब सियासी हमले हुए।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जहां अपनी सरकार में शहरों में चैबीस घण्टे बिजली मुहैया कराने का दावा करते दिखे तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मामले में उन्हें कटघरे में खड़ा करने की कोई कसर नहीं छोड़ी। यहां तक की केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने काशी में अपने कार्यक्रम के दौरान बिजली गुल होने पर भी अखिलेश पर सवाल उठाये। इन सबके बीच योगी आदित्यनाथ ऐसे शख्स थे, जिन्होंने बिजली पर अखिलेश यादव का सबसे ज्यादा हमला झेला। अखिलेश ने यहां तक कहा था कि गोरखपुर के बाबा को अगर यह देखना है कि बिजली आ रही है या नहीं, तो वह बिजली का तार पकड़ लें, उन्हें खुद इस बारे में पता चल जायेगा। अखिलेश ने भले ही योगी आदित्यनाथ पर तब तंज कसा हो, लेकिन अब योगी सूबे के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इसलिए यह तय है कि योगी आदित्यनाथ अपने कार्यकाल में बिजली व्यवस्था में सुधार को बेहद गम्भीरता से लेंगे और उन्होंने इसकी शुरूआत भी कर दी है। यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ बतौर सीएम न सिर्फ राज्य की बिजली व्यवस्था को दुरूस्त करने में जुट गए हैं, बल्कि ऐसे अधिकारियों से भी जवाब तलब कर रहे हैं जो 24 घण्टे बिजली मुहैया कराने का दावा करते थे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि वह समीक्षा कर बताएं कि जनवरी से अब तक प्रदेश के जिला मुख्यालयों, ग्रामीण क्षेत्रों, तहसील में कितनी बिजली सप्लाई की गई और जुलाई तक कितनी बिजली की जरूरत है। इसके साथ ही अधिकारियों से पीक आवर्स में रोस्टर के मुताबिक बिजली नहीं देने की वजह भी पूछी गई है। ऐसे में दोषी पाये जाने पर इन अधिकारियों पर जरूर कार्रवाई हो सकती है।
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