
लखनऊ। सरकार के आर्थिक और राजनैतिक लाभ के पक्ष में उत्तर प्रदेश के राज्य कर्मचारी उतरने लगे है। जवाहर भवन इन्दिरा भवन कर्मचारी महासंघ ने आज सरकार को सेवानिवृत्ति अवधि बढ़ाने से होने वाले आर्थिक और राजनैतिक लाभ की जानकारी देते हुए सेवानिवृत्ति अवधि 60 से 62 वर्ष करने की मांग की है। महासंघ के अध्यक्ष सतीश कुमार पाण्डेय और महामंत्री सुशील कुमार बच्चा ने आज पत्रकारों से कहा कि अगर सरकार ने इस एक माॅग पर विचार नही किया तो 15 जुलाई से प्रान्त व्यापी आन्दोलन शुरू किया जाएगा।
महासंघ कार्यालय में पत्रकारो से बातचीत में उक्त नेताओं ने कहा कि बदलते वक्त में समाज में बदलाव आया है। भारत में आम आदमी की औसत आयु बढ़ी है। सामान्यतः 28 से 30 वर्ष में सरकारी सेवा पाने वाले कर्मचारी अल्प समय में अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वाहन नही कर पाता अगर उसे दो वर्ष और मिल जाए तो वह अपनी पारिवरिक जिम्मेेदारी निर्वहन करेगा और साथ ही सरकार को लाखों रूपये का लाभ और अनुभवी कर्मचारी मिलेगा। उन्होंने कहा कि अगर सर्जन को 65 वर्ष तक काम करने दिया जाता है तो यह सोचना चाहिए कि वह सीधे आपरेशन करता है जो जीवन और मौत का सवाल होता है, जब उस उम्र में उसके हाथ नही काॅपगें तो क्या बाबू या अन्य कर्मचारी अपना काम नही सकते।
उन्होंने प्रदेश सरकार को याद दिलाया कि भाजपा शासित राज्य छत्तीसगढ़ मध्यम प्रदश्ेा में राजकीय सेवा की अधिवर्षता 62 वर्ष हो चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष औसतन 10 से 15 हजार कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे है जिसके सापेक्ष संविदा और ठेके पर जो कर्मचारी रखे जा रहे है वह अनुभवहीन और गैर जिम्मेदार होते है क्योकि उन्हें मालूम होता है कि उनकी नौकरी पक्की नही है। ऐसे में शासकीय कार्य का प्रभावित होना निश्चित है। ऐसे में बेहतर होगा कि राजकीय सेवकों की सेवा निवृत्ति अवधि 62 वर्ष की जाए।
https://rashtriyadinmaan.com
