
उत्तर प्रदेश इंजीनियर्स एसोसिएशन ने नौकरशाहो की भूमिका पर उठाये सवाल
लखनऊ.।उत्तर प्रदेश इंजीनियर्स एसोएिसशन ने नौकरशाही पर आरोप लगाते हुए कहा कि लोक निर्माण विभाग में 26 वर्षो के बाद स्वीकृत एसीपी का प्रकरण अब नौकरशाहों के कारण एक वर्ष से शासन स्तर पर लम्बित है। विकास की रीढ़ कहे जाने वाले इस संवर्ग के तमाम पत्रों को मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री तक नही पहुंचने दिया जा रहा है। एसोसिएशन के महासचिव इं. सुरजीत सिंह निरंजन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि अभियंत्रण संवर्ग की काफी समस्याएं लम्बित है अतः अभियंत्रण संवर्ग की समस्याओं के निस्तारण के लिए एक बैठक अवश्य की जानी चाहिए।
श्री निरजंन ने आज इस सम्बंध में कहा कि वर्तमान लोकप्रिय सरकार को सत्ता में आए एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। इस सरकार से अभियंत्रण संवर्ग को काफी आशयें थी क्योकि वर्तमान सरकार का एजेण्डा प्रदेश के विकास से जुड़ा है। परन्तु विकास प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अभियंता संवर्ग की लगातार अवहेलना हो रही है। समस्त तकनीकि निर्णय नौकरशाहों की इच्छानुसार लिये जा रहे है। अभियंता संवर्ग की समस्याओं से कई बार एसोसिएशन लिखित रूप से मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री,मुख्य सचिव, अभियंत्रण सेवा के अपर प्रमुख सचिवों को पत्र लिखकर वार्ता का समय मांग चुका है लेकिन आज तक एसोसिएशन के प्रतिनिधि मण्डल का वार्ता का समय न दिया जाना सीधे सीधे इंजीनियर्स संवर्ग की उपेक्षा को परिलक्षित करता है। ऐसी स्थिति में इंजीनियर्स संवर्ग में काफी निराशा व्याप्त हैं।
अभियंताओं की सचिवालय स्तर पर लम्बित समस्याओं और सरकार से सीधे संवाद न होने के कारण ही वर्तमान में उ.प्र. आवास विकास परिषद और जल निगम इंजीनियर्स संघ को आन्दोलन करना पड़ रहा है। उ.प्र. लोक निर्माण विभाग में 26 वर्षो बाद स्वीकृत एसीपी का प्रकरण पिछले एक वर्ष से शासन में लम्बित है। एसीपी के आदेश आज तक जारी न होना इस बात का घोतक है कि नौकरशाहों की कार्यशैली अभियंताओं के प्रति ठीक नही है। इससे सरकार की छबि तो धूमिल हो ही रही है साथ ही भ्रष्टाचार को बढावा मिल रहा है। जबकि प्रशासनिक और सचिवालय संवर्गो के अधिकारियों के एसीपीे के आदेश एक सप्ताह में निर्गत हो जाते है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रदेश के अभियंत्रण सेवा में बढ़ रही कुठा एवं निराशा को रोकने के लिए अतिशीघ्र संवाद की स्थिति निर्मित कराये।
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