विधानसभा चुनाव को देखते हुए यूपी में 2700 करोड़ के विकास कार्यों पर लगा ब्रेक


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लखनऊ    । विधानसभा चुनाव को देखते हुए यूपी के बड़े बडे़ ठेकेदारों ने विकास कार्यों पर ब्रेक लगाने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश में विकास के करीब 2700 करोड़ रूपए के काम अब तक रुक चुके हैं। आगे आने वाले दिनों में तकरीबन 4000 करोड़ रूपए के काम रूक जाएंगे। प्रदेश सरकार विकास काम को पूरा न करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।

दरअसल पूरे उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार ने विकास के करीब 15000 करोड़ रूपए के काम आवंटित किए। इनमें अधिकांश काम लोक निर्माण विभाग, नगर विकास, जल निगम, राज्यकीय निर्माण निगम, लेकफेड, पैक्सफेड, राज्यकीय सेतु निगम, राज्य सम्पत्ति विभाग द्वारा कराए जा रहे हैं। इनमें लोक निर्माण विभाग ने बीते आठ महीनों में 7000 करोड़ रूपए की सड़कों के चैड़ीकरण काम आवंटित कर दिया था। इनमें से लगभग 3500 करोड़ रूपए का काम आवंटन के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। इसके पीछे अधिकारी ये कारण बता रहे हैं कि ठेकेदार चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना को देखते हुए नए काम लेने को तैयार नहीं है। इनका कहना है कि वे अब नई सरकार आने के बाद ही अपना काम शुरू करेंगे।

इनमें कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बहराईच, गोंडा की सड़कों के निर्माण का काम प्रभावित हुआ है। इसी प्रकार सिंचाई विभाग द्वारा नहरों की सफाई, नहरों में नई पुलिया बनाए जाने के 30 फीसदी कामों को ठेकेदारों द्वारा रोक दिया गया है। ठेकेदार इन काम को स्वीकृत होने के बाद भी शुरू नहीं कर रहे हैं। सेतु निगम द्वारा बनाए जा रहे पुलों के निर्माण का काम भी अधिसूचना के कारण प्रभावित होने की संभावना है। इसके अलावा राज्य सम्पत्ति विभाग द्वारा करीब 950 करोड़ के जो काम आवंटित कर दिए गए थे, लेकिन ठेकेदार उन्हें इसलिए नहीं शुरू कर रहे हैं क्योंकि उन्हें भय है कि अगर चुनाव आयोग ने उन्हें रोक दिया तो उनका पैसा फंस जाएगा।

यूपी राजकीय निर्माण ठेकेदार एसोसिएशन ने इस संबंध में बताया कि जब भी चुनाव के वक्त काम कराया जाता है तो उस काम को चुनाव आयोग रुकवा देता है। जिसके कारण उनका करोड़ों रूपया फंस जाता है। यही कारण है कि इस बार ठेकेदार उन कामों में हाथ डालने को तैयार नहीं हैं। इसके विपरीत राज्य सरकार ने नया सर्कुलर जारी करके निर्देश दिए हैं कि प्रदेश भर में सभी आवंटित कार्य समय सीमा के भीतर पूरे करा लिए जाएं। कार्य में गुणवत्ता का भी ख्याल रखा जाए। अगर इसमें लापरवाही बरती गई तो संबंन्धित कार्यदायी संस्था के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।


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