
शासनादेश की अवहेलना कर
महाविद्यालय कर्मचारी ने ही दिया अनुमोदित महिला शिक्षिका को जान से मरवा डालने की धमकी
एम.जे.पी.रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय बरेली
lucknow | मामला जनपद बदायूं के अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय गोविन्द बल्लभपंत पी.जी.कालेज काछला से जुड़ा है। जहाँ अंग्रेज़ी विभाग में स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षिका डां.दीपशिखा शर्मा विश्वविद्यालय से अनुमोदनोपरान्त दिनांक 18.06.2012 से कार्यरत है। लेकिन महाविद्यालय के ही कार्यालय अधीक्षक शिशुपाल सिंह एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ज्ञानेन्द्र पाल सिंह द्वारा महिला शिक्षका का निरन्तर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न व शोषण किया जाता रहा। शिक्षिका द्वारा जिसकी लिखित व मौखिक शिकायत कार्यवाहक डां.फैजान अहमद से करने के बावजूद महाविद्यालय के स्थाई आरोपी कर्मचारियों को बचाने के लिए प्राचार्य द्वारा एक आन्तरिक जांच कमेटी के एक तरफा निर्णय के आधार पर दिनांक 28.05.2018 के लिखित पत्र के आधार पर शारीरिक व मानसिक रुप से प्रताड़ित महिला शिक्षिका की तत्काल प्रभाव नियम कानून व शासनादेश को दरकिनार कर सेवा ही समाप्त कर दी गयी।
महाविद्यालय कर्मचारी शिशुपाल सिंह एवं ज्ञानेन्द्र पाल सिंह द्वारा महिला शिक्षिका को कई बार महाविद्यालय से निकलवा देने व जान से मरवा डालने की धमकी भी दी जा चुकी है जिसकी शिकायत शिक्षिका द्वारा राज्य महिला आयोग शाखा बदायूं व मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी की गयी थी लेकिन प्रबन्धतंत्र व प्राचार्य के रसूख के आगे स्थानीय पुलिस भी घुटना टेक चुकी है। जिसके कारण महिला शिक्षिका अवसाद का शिकार हो चुकी है।
प्राचार्य द्वारा की गयी सेवा समाप्ति की कार्यवाही ही अपने आप में हास्यास्पद है। प्राचार्य के पत्र से ही स्पष्ट हैकि 18 जुलाई 2012 से कार्यरत महिला शिक्षिका के खिलाफ दिनांक 28.02.2018 के पूर्व किसी भी प्रकार की कोई शिकायत नही है तो सवाल यह हैकि 06 वर्ष से कार्यरत महिला शिक्षिका यकायक मात्र 03 महीने में अनुशासनहीन आचरणहीन एवं आवाछित व्यवहार की धनी कैसे हो गयी ?
महिला शिक्षिका की लिखित शिकायत के बावजूद प्राचार्य/प्रबन्धक द्वारा शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न व जान से मरवा डालने की धमकी देने के आरोपी कार्यालय अधीक्षक शिशुपाल सिंह एवं कर्मचारी ज्ञानेन्द्रपाल सिंह के विरुद्ध कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गयी ??
महिला शिक्षिका के विरुद्ध की गयी एकतरफा कार्यवाही में प्राचार्य/प्रबन्धक द्वारा शासनादेश दिनांक 23 अगस्त 2011 एवं दिनांक 30 मई 2013 की खुलेआम धज्जियां उड़ायी गयी है। जिसके अनुसार किसी भी अनुमोदित शिक्षक के निस्कासन व सेवा समाप्ति के पूर्व विश्वविद्यालय के कुलपति की अनुमति/अनुमोदन ही अनन्तिम होगा। बावजूद इसके महाविद्यालय प्राचार्य व प्रबन्धक द्वारा तत्काल प्रभाव से स्वयं ही महिला शिक्षिका की सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर महिला शिक्षिका को 28.05.2018 महाविद्यालय से निस्कासित कर दिया गया।
अनुदानित महाविद्यालय विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश द्वारा उत्पीड़ित व निस्कासित महिला शिक्षिका प्रकरण से मुख्यमंत्री एवं उच्चशिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश तथा कुलपति प्रो.अनिल शुक्ला को वांछित अभिलेखो व प्राचार्य द्वारा किये गये नियम विरुद्ध आदेश की छाया प्रति सहित अवगत कराते हुए नियमानुसार कार्यवाही की मांग की गयी है।
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