आधी रात को संसद के विशेष सत्र में लागू होगा जीएसटी


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नई दिल्ली: करीब एक दशक लंबी यात्रा के बाद आजादी के बाद का सबसे बड़ा कर सुधार जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) शुक्रवार (30 जून) को आधी रात से लागू हो जाएगा, जिसके लिए संसद के केंद्रीय हॉल में आधी रात को विशेष सत्र का आयोजन किया गया है. इस मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, सांसद, राज्यों के वित्तमंत्री और मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे. जीएसटी को लांच करने के लिए शुक्रवार आधी रात को एक घंटे का कार्यक्रम रखा गया है, जिसने आजादी के बाद 1947 के ‘नियति से साक्षात्कार’ क्षण की यादें ताजा कर दी हैं.

इस मौके पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री अपने उदगार व्यक्त करेंगे और जीएसटी के बारे में दो लघु फिल्में भी दिखाई जाएंगी. साल 1947 की 14-15 अगस्त की आधी रात को देश ने अंग्रेजों से आजादी हासिल की थी और संसद के केंद्रीय हॉल में एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया था, जिसमें भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ‘नियति से साक्षात्कार’ का प्रसिद्ध भाषण दिया था.

वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने 30 जून की आधी रात को होने वाले इस विशेष समारोह में भाग नहीं लेने का फैसला किया है और कहा है कि सरकार अखिल भारतीय कर सुधार को लागू करने में ‘अनावश्यक विनाशकारी जल्दीबाजी’ कर रही है. राजनीतिक दलों के सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर राजनीतिक दल इस समारोह का बहिष्कार करेंगे और इस आयोजन से दूर रहेंगे. इस मुद्दे पर बुधवार (28 जून) को विपक्षी दलों के बीच राष्ट्रपति उम्मीदवार मीरा कुमार के नामांकन दाखिल करने के दौरान अनौपचारिक रूप से बातचीत हुई थी.

 

कांग्रेस ने जीएसटी लागू करने की घोषणा के लिए 30 जून की मध्य रात्रि में बुलायी गई संसद की विशेष बैठक में भाग नहीं लेने का निर्णय किया. पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने बताया कि कांग्रेस जीएसटी लागू करने के बारे में विशेष बैठक में भाग नहीं लेगी. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य नेताओं से मुलाकात के बाद यह निर्णय किया गया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा, ‘देश की भयावह सच्चाइयों की अनदेखी कर कांग्रेस इस तमाशे की भागीदार नहीं बन सकती.’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस जीएसटी के विरोध में नहीं है तथा यदि कांग्रेस इससे संबंधित संविधान संशोधन को समर्थन नहीं देती तो संसद में इसके पारित होने में मुश्किल आती है.

शर्मा ने शुक्रवार को संसद में होने वाले समारोह का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और सरकार ‘हमारे देश के स्वतंत्रता आंदोलन और उसमें दिए गये लोगों के बलिदानों का अपमान कर रही है.’ उन्होंने कहा कि आज छोटे व्यापारियों और कारोबारियों की कोई सुन नहीं रहा है. उन्होंने कहा कि इस दावे का क्या अर्थ कि ‘एक देश एक कर’ जबकि पेट्रोल उत्पादों, बिजली दरों एवं रियल एस्टेट को इससे अलग रखा गया है. उन्होंने दावा किया कि दुनिया भर में सबसे अधिक जीएसटी दरें अपने ही देश में लगायी जा रही हैं.

कांग्रेस के एक अन्य नेता जयराम रमेश ने कहा कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरोध के कारण जीएसटी को लागू होने में दस साल का विलंब हो गया. उन्होंने कहा, ‘एक व्यक्ति (मोदी) जिसने इसका दल साल विरोध किया वह इसकी महापैरवी कर रहा है.’ रमेश ने कहा कि यदि भाजपा का विरोध नहीं होता तो जीएसटी तीन साल पहले ही लागू हो चुका होता.

कुछ नेताओं का मानना है कि जीएसटी को जल्दबाजी में लागू किया जा रहा है तथा सभी पक्षों को ध्यान में नहीं रखा गया है जिसके कारण छोटे व्यापारियों एवं कारोबारियों के लिए समस्याएं बढ़ सकती है. सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के स्वतंत्रता के समय दिए गये ‘नियति से किये गये वादे’ वाले ऐतिहासिक अवसर का महत्व कम नहीं करना चाहती. इसीलिए वह इस प्रकार के किसी कार्यक्रम में भाग लेने को इच्छुक नहीं है माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी भी जीएसटी लागू करने के मामले में सरकार द्वारा जल्दबाजी दिखाये जाने को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि भाजपा ने विपक्ष में रहने के दौरान इस प्रणाली का विरोध किया था.


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