
ग्रेटर नोएडा | ग्रेटर नोएडा में दुर्गा पूजा के बाद आज और कल होने वाले मूर्ति विसर्जन को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने शहर में दो स्थानों पर मूर्ति विसर्जन की वैकल्पिक व्यवस्था की है। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुपालन में उठाया गया है। जिससे नोएडा और ग्रेटर नोएडा से होकर बहने वाली यमुना और हिंडन नदियों में मूर्तियों और अन्य कचरे को डंपिंग करने पर रोक लगेगी।
ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, प्राधिकरण ने सेक्टर नॉलेज पार्क 1 में आईईसी कॉलेज के पास ग्रीन बेल्ट में और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में चेरी काउंटी के सामने ग्रीन बेल्ट में स्पॉट विकसित किए हैं। प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी दीपचंद ने कहा, ‘भक्त इन स्थानों पर मूर्तियों को विसर्जित कर सकते हैं और अनुष्ठान कर सकते हैं। यह कदम हिंडन और यमुना तक पहुंच रहे प्रदूषकों को रोकने में मदद करेगा।’
यमुना में विसर्जन के कारण प्रदूषण को कम करने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 29 जनवरी, 2019 को एक आदेश जारी किया है। जिसके मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अधिकारियों को विभिन्न इलाकों में कृत्रिम तालाब और गड्ढे बनाने के लिए निर्देशित किया था। 15 सितंबर 2015 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने त्वरित रूप से जमने वाले जिप्सम प्लास्टर (प्लास्टर ऑफ पेरिस) या प्लास्टिक जैसी प्रदूषणकारी (गैर-बायोडिग्रेडेबल) सामग्री से बनी मूर्तियों के यमुना में विसर्जन पर रोक लगा दी थी।
ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, प्राधिकरण ने सेक्टर नॉलेज पार्क 1 में आईईसी कॉलेज के पास ग्रीन बेल्ट में और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में चेरी काउंटी के सामने ग्रीन बेल्ट में स्पॉट विकसित किए हैं। प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी दीपचंद ने कहा, ‘भक्त इन स्थानों पर मूर्तियों को विसर्जित कर सकते हैं और अनुष्ठान कर सकते हैं। यह कदम हिंडन और यमुना तक पहुंच रहे प्रदूषकों को रोकने में मदद करेगा।’
यमुना में विसर्जन के कारण प्रदूषण को कम करने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 29 जनवरी, 2019 को एक आदेश जारी किया है। जिसके मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अधिकारियों को विभिन्न इलाकों में कृत्रिम तालाब और गड्ढे बनाने के लिए निर्देशित किया था। 15 सितंबर 2015 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने त्वरित रूप से जमने वाले जिप्सम प्लास्टर (प्लास्टर ऑफ पेरिस) या प्लास्टिक जैसी प्रदूषणकारी (गैर-बायोडिग्रेडेबल) सामग्री से बनी मूर्तियों के यमुना में विसर्जन पर रोक लगा दी थी।
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