निजीकरण के फैसले विरोध में बिजली कर्मचारियों ने प्रान्त भर में विरोध प्रदर्शन किया, 27 मार्च को प्रान्त व्यापी कार्य बहिष्कार की चेतावनी


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: प्रबन्धन पर सरकार को गुमराह करने का आरोप:

 लखनऊ और लेसा के दफ्तरों में सन्नाटा,
शक्ति भवन पर आक्रोशित कर्मचारियों का उमड़ा सैलाब

lucknow |विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के आह्वान पर विद्युत वितरण के निजीकरण के फैसले के विरोध में आज बिजली कर्मचारियों और अभियन्ताओं ने प्रान्त भर में विरोध सभायें कर सरकार को चेतावनी दी कि यदि निजीकरण का फैसला वापस न लिया गया तो 27 मार्च को प्रान्त व्यापी कार्य बहिष्कार होगा।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने ऊर्जा विभाग व पावर कारपोरेशन के प्रबन्धन के आला अधिकारियों पर बिजली सुधार के मामले में प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्य नाथ को गुमराह करने का आरोप लगाया है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि एक ओर तो उप्र सरकार एक साल की अवधि पूरी होने पर उपलब्धियों का जश्न मना रही है जिसमें बिजली के क्षेत्र में सुधार की उपलब्धियां बहुत महत्वूपर्ण हैं। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा ने कल बयान देकर कहा है कि एक साल में बिजली की व्यवस्था में भारी सुधार हुआ है और इसी सुधार के चलते जिला मुख्यालयों पर 24 घण्टे, तहसील मुख्यालयों पर 20 घण्टे और गांव में 18 घण्टे अबाध बिजली दी जा रही है। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा है कि एक वर्ष में ग्रामीण क्षेत्र में 21 प्रतिशत, तहसीलों में 17.7 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 9.1 प्रतिशत बिजली आपूर्ति में वृद्धि हुई है। एक वर्ष में 238990 खराब ट्रांसफार्मर बदले गये हैं और 14316 नये ट्रांसफार्मर लगाये गये है, 32.77 लाख नये बिजली कनेक्शन दिये गये हैं, 57036 मजरों में बिजली पहुंचायी गयी है और 11.60 लाख बीपीएल परिवारों को निशुल्क कनेक्शन दिये गये हैं।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री द्वारा जारी किये गये आंकड़े पूरी तरह सत्य हैं ऐसे में जब सरकार की ही दृष्टि में बिजली के क्षेत्र में उत्साहजनक सुधार हो रहा है तब सुधार के नाम पर प्रदेश के सबसे प्रमुख 05 शहरों जिसमें प्रदेश की राजधानी लखनऊ जो देश के गृहमंत्री का संसदीय क्षेत्र भी है, प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी और मुख्यमंत्री का संसदीय क्षेत्र गोरखपुर भी शामिल है की बिजली व्यवस्था के सुधार के नाम पर निजीकरण किया जाना सरकार के सुधार के दावों के सर्वथा विपरीत है और जनता के साथ सरासर धोखा है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आज विरोध सभाओं के माध्यम से मुख्यमंत्री का ध्यानाकर्षण करते हुए उनसे एक बार पुनः अपील की है कि निजीकरण का फैसला व्यापक जनहित में वापस लिया जाये और ऊर्जा विभाग व पावर कारपोरेशन के गुमराह करने वाले आला अधिकारियों को तत्काल उनके पद से हटाया जाये जिससे ऊर्जा क्षेत्र में अनावश्यक टकराव न हो।

संघर्ष समिति ने निजीकरण के फैसले को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि बिजली के क्षेत्र में देश में निजीकरण पूरी तरह विफल हो चुका है और खास करके उप्र में आगरा व ग्रेटर नोएडा के निजीकरण के चलते पावर कारपोरेशन को अरबों खरबों रूपये की क्षति उठानी पड़ रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के फैसले पर आगे बढ़ने के पहले उप्र सरकार को पूर्ण निष्पक्षता से आगरा व ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के नाम पर हुए घोटालों की निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने यह भी कहा है कि यदि इसी प्रकार आला आई ए एस अधिकारी सरकार को गुमराह करते रहे और कर्मचारियों की न्यायोचित आवाज न सुनी गयी तो संघर्ष समिति आम जनता के बीच जायेगी और निजीकरण के पीछे के घोटालों का सच उजागर करेगी।

संघर्ष समिति के आह्वान पर आज वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ, मुरादाबाद, लखनऊ, आजमगढ़, इलाहाबाद, मिर्जापुर, अनपरा, ओबरा, पिपरी, कानपुर, पनकी, झांसी, पारीछा, बांदा, फैजाबाद, गोण्डा, बस्ती, बरेली, गाजियाबाद, सहारनपुर, अलीगढ़, हरदुआगंज, आगरा और अन्य सभी जनपदों में बिजली कर्मचारियों व अभियन्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किये और निजीकरण के फैसले के विरूद्ध अपना आक्रोश व्यक्त किया है।

लखनऊ में शक्तिभवन मुख्यालय पर हुई बड़ी विरोध सभा को समिति के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पाण्डेय, सद्रूद्दीन राना, सुहैल आबिद, विपिन प्रकाश वर्मा, राजेन्द्र घिल्डियाल, परशुराम, पी एन तिवारी, महेन्द्र राय, शशिकान्त श्रीवास्तव, करतार प्रशाद, केएस रावत, आर एस वर्मा, मो इलियास, कुलेन्द्र प्रताप सिंह, ए के श्रीवास्तव, पवन श्रीवास्तव, शम्भू रत्न दीक्षित ने मुख्यतया सम्बोधित किया।

 


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