
लखनऊ। इंजीनियरिंग विभागों में प्रदेश के विकास के कार्याे में निविदायें आमंत्रित करने पर ठेकेदारों में प्रतिस्पर्धा के तह्त 30 से 40 प्रतिशत तक कम दरों पर टेण्डर डाल दिये जाते है। इसका परिणाम यह होता है कि अधिकत्तर कार्यो की गुणवत्ता प्रभावित होती है। जब इसकी जाॅच या मापन कार्य कार्मिकों और अधिकाकरियों द्वारा किया जाता है तो कमी निकलने पर ठेकेदारों द्वारा अधिकारियों एवं कार्मिकों पर भुगतान का दबाव बनाने के लिए गाली गलौच से लेकर प्राणघातक हमले एवं कई हत्याएं तक हो चुकी है। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के प्रदेश अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि इस मसले पर लम्बी वार्ता और तथ्यों के आधार पर लोक निर्माण विभाग विभााध्यक्ष स्तर पर एक आदेश जारी हो चुका है। इस आदेश के आने के बाद विभाग में कम दर पर टेण्डर डालने वाले ठेकेदारों पर लगाम लगेगी और कोई भी कार्य गुणवत्ता के साथ होगा।
संघ के मीडिया प्रभारी मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि विभागाध्यक्ष एवं संघ के पदाधिकारियों के बीच इस मसले को लेकर कई बैठकों के बाद ऐसे प्रकरणों को रोकने तथा पूरी गुणवत्ता प्राप्त करने के उद्देश्य से डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ और लोक निर्माण विभाग विभागाध्यक्ष इं. वी.के. सिंह की सहमति बनने पर एक आदेश जारी किया गया। जिसमें अब 15 प्रतिशत से कम निविदा दरें ठेकेदारों द्वारा डालने पर निर्माण/ मरम्मरत कार्यों का साइटों पर मापन एवं भुगतान की कार्यवाही करने एक कमेटी भेजी जाएगी जिसमें चार जूनियर इंजीनियर ठेकेदार द्वारा कराये गए कार्य की गुणवत्ता एवं मापन करेगें और कार्य सही पाए जाने पर भुगतान की कार्यवाही की जाएगी।
यह कार्यवाही निर्माण कार्य समाप्त होने के दस दिनों के भीतर ही करनी होगी। इस आदेश के उपरान्त संघ के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी, महामंत्री वी.के. कुशवाहा, इं. दिवाकर राय, इं. एन.डी. द्विवेदी, इं. राजेश वर्मा, इं, रामवीर और इं. राजर्षि त्रिपाठी ने आशा व्यक्त की है कि अब विकास एवं निर्माण कार्य में पहले से अधिक गुणवत्ता सुनिश्चित होगी एवं आए दिन कार्मिकों और अधिकारियों को ठेकेदारों द्वारा धमकाने जैसी घटनाओं पर विराम लगंेगा।
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