पुरानी पेंशन मंच के साथ आया स्वशासी,स्वायतशासी कर्मचारी महासंघ 25, 26 और 27 के कार्य बहिष्कार के साथ हर आन्दोलन में होगी भागीदारी


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लखनऊ,। कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी-पुरानी पेंशन बहाली मंच के आन्दोलन में आज उत्तर प्रदेश स्वशासी,स्वायतशासी कर्मचारी महासंघ के बैनर तले 36 संगठनों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। इस महासंघ के अधिनस्थ लगभग एक लाख कर्मचारी कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी-पुरानी पेंशन बहाली मंच के बैनर तले 25,26 और 27 के कार्यबहिष्कार और अगले आन्दोलन में शिरकत करेगें। यह निर्णय आज मंच के नेता हरिकिशोर तिवारी की अध्यक्षता में मण्डी परिषद में आयोजित उत्तर प्रदेश स्वशासी,स्वायतशासी कर्मचारी महासंघ पदाधिकारियोें की बैठक में लिया गया। इस दौरान महासंघ के अध्यक्ष कमलेश वर्मा और महामंत्री रामजी तिवारी ने कहा कि पेंशन ऐसा प्रकरण है जिससे हर कर्मचारी प्रभावित है। इसलिए इस आन्दोलन मेें हम तनमनधन से शामिल हो रहेे।

उत्तर प्रदेश स्वशासी,स्वायतशासी कर्मचारी महासंघ की बैठक में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नीवन सिंह, खादी बोर्ड के ब्रजेश मिश्रा, हरिगेन्द सिंह , अवधेश कुमार, राकेश पाण्डेय, रतन लाल, कामत प्रसाद, शिवराम, रमेश कटियार, दिनेश श्रीवास्तव, अतुल टण्डन, कमलेश मिश्र, उर्मिला राय, सुनीता गौतम, मंच के नेतागण क्रमश संजीव गुप्ता, बी.एस. डोलिया और अमिता त्रिपाठी मौजूद थी। इस दौरान न्यू ओखला इन्डस्ट्रियल एथारिटी,गोरखपुर इन्डस्ट्रियल डेवलपमेन्ट, सतहरिया औद्योगिक विकास प्राधिकारण, उत्तर प्रदेश खादी बोर्ड, मण्डी परिषद, उत्तर प्रदेश बीज प्रामाणीकरण संस्था,जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद, उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान,उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद, उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान,उत्तर प्रदेश ऊर्दू अकादमी, उत्तर प्रदेश सचिवालय सत्कार सेवा, उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी, उत्तर प्रदेश सिन्धी अकादमी, उत्तर प्रदेश नाटय अकादमी के नेताओं ने इस बैठक को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली का यह प्रचण्ड रूप अब हर राज्य में दिखाई पड़ेगा। इसके बाद देश का कर्मचारी दिल्ली पहुंच गया तो सरकार की कुर्सी हिलना तय है। देश के लगभग 2.50 करोड राज्य कर्मचारी और 36 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों की नई पेंशन योजना के तहत अब तक लगभग दस हजार करोड़ रूपये नई पेंशन के नाम पर केन्द्र और राज्य कर्मचारियों के नाम से लिए गए लेकिन इस बड़ी धनराशि का कोई लेखा जोखा सरकारों के पास नही है। सरकार की इस योजना से छोटे से लेकर बड़े स्तर तक के कर्मचारी नाराज है, लेकिन आला अफसर डर के मारे विरोध नही कर पा रहे है लेकिन अन्दर से वे भी हमारे साथ है। वक्ताओं ने कहा कि यह तो सीधे सीेधे धोखा है। वे ऐसा नही कर सकते एक वर्ग को पेंशन मिलेगी और दूसरे को नही मिलेगी यह दोहरी नीति और कर्मचारी शिक्षक बर्दाश्त नही करेगें।


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