सड़क सुरक्षा कोष की वित्तीय वर्ष 2015-16 की वार्षिक कार्य योजना अनुमोदित
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री आलोक रंजन ने निर्देश दिये हैं कि आगामी एक वर्ष के अन्दर पूर्व से चिन्हित लगभग 1200 दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र (ब्लैक स्पाट्स) में सड़क दुर्घटना रोकने के लिये लोक निर्माण विभाग योजना बनाकर क्रियान्वयन कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि योजना के तहत सड़कों की मरम्मत एवं अधिक टर्न को कम करने आदि कार्यों को प्राथमिकता से कराया जाना सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि लखनऊ शहर के बढ़ते हुये यातायात को नियंत्रित करने हेतु अभी और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने आई0जी0 ट्रैफिक को निर्देश दिये कि यातायात को नियंत्रित करने हेतु एक सप्ताह में माइक्रो प्लान बनाकर क्रियान्वित कराना सुनिश्चित करायें, ताकि यातायात का त्वरित गति से आवागमन हो सके। उन्होंने स्थानीय नगर निकायों तथा अन्य सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये कि सड़कों पर किये गये अतिक्रमण तथा अनावश्यक होर्डिंग्स को हटवाया जाये।उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने हेतु स्कूली बच्चों को प्रशिक्षित किया जाये। उन्होंने कहा कि यातायात के बढ़ते हुये दबाव को कम करने के लिये जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित कर विद्यालयों के खुलने एवं बंद होने के समय में समुचित अन्तराल कराये जाने पर गंभीरता से विचार किया जाये। उन्होंने कहा कि मण्डलीय सड़क सुरक्षा समितियों एवं जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकें नियमित रूप से अवश्य सुनिश्चित कराकर कृत कार्यवाही की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों द्वारा अवश्य प्राप्त की जाये।
मुख्य सचिव आज शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की उच्च स्तरीय समिति एवं कोष प्रबन्धन समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने निर्देश दिये कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर ओवर स्पीडिंग और खतरनाक ड्राइविंग आदि का कड़ाई से पुलिस विभाग द्वारा चेकिंग करते हुये नियमानुसार कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करायी जाये। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि जिनका मौके पर चालान न हो सके, उनके लिये ई-चालान सिस्टम लागू किया जाये। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने लिये आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही की जाये। चालकोें के समुचित प्रशिक्षण हेतु सभी संभागीय मुख्यालयों पर रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेण्टर को चरणबद्ध ढंग से लागू कराने हेतु जिलाधिकारी सेण्टर स्थापित कराने के लिये प्राथमिकता से निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि 35 जनपदों में आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक की स्थापना का कार्य प्राथमिकता से सुनिश्चित कराया जाये। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त अवशेष 40 जनपदों में भी चरणबद्ध ढंग से आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के निर्माण की कार्यवाही प्राथमिकता से सुनिश्चित करायी जाये। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाये कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में कानपुर, गोरखपुर, लखनऊ, आजमगढ़ तथा कन्नौज में सड़क सुरक्षा कोष से आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक निर्मित करा दिये जायें। उन्होंने कहा कि लखनऊ में माॅडल इंसपेक्शन एण्ड सर्टिफिकेशन सेण्टर का निर्माण आगामी मार्च, 2016 तक पूर्ण कराते हुये इसी तर्ज पर अन्य मण्डलीय मुख्यालयों पर चरणबद्ध तरीके से सेण्टर की स्थापना कराने का कार्य सुनिश्चित कराया जाये। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि प्रदेश के नौ जनपदों में ट्रैफिक सिंग्नल प्रणाली एवं ई-चालान सिस्टम लागू हो जाने के बाद प्रदेश के अन्य अवशेष जनपदों में भी यह व्यवस्था प्राथमिकत से लागू करने की कार्यवाही आवश्यकतानुसार सुनिश्चित करायी जाये। बैठक में सड़क सुरक्षा कोष से वर्ष 2014-15 में किये गये व्यय का अवलोकन किया गया तथा वर्ष 2015-16 की वार्षिक कार्य योजना को अनुमोदित किया गया।
परिवहन आयुक्त श्री के0रवीन्द्र नायक ने बताया कि वार्षिक कार्य योजना 2015-16 हेतु स्वीकृत 25 करोड़ रुपये में से ब्लैक स्पाट्स के सुधार हेतु 660 लाख रुपये, पब्लिसिटी वैन के क्रय हेतु 110 लाख रुपये, आटोमैटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक का निर्माण हेतु 150 लाख रुपये, ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के निर्माण हेतु 175 लाख रुपये, फिटनेस पिट के निर्माण हेतु 285 लाख रुपये, सचल जांच संयत्र हेतु 70 लाख रुपये, इण्टरसेप्टर हेतु 75 लाख रुपये तथा सड़क सुरक्षा कार्यों के मूल्यांकन एवं निरीक्षण हेतु वाहन क्रय करने के लिये 25 लाख रुपये अर्थात कुल 1550 लाख रुपये पूंजीगत व्यय में प्रस्तावित है। इसी प्रकार राजस्व व्यय में यातायात नियमों के प्रचार-प्रसार, प्रशिक्षण, डाक्यूमेंट्री फिल्म का निर्माण, स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता, नशे में गाड़ी चलाने वालों की चेकिंग हेतु ब्रीथ एनलाइजर का क्रय में कुल मिलाकर 503 लाख रुपये, सड़क सुरक्षा सेल के अधिकारियों/कर्मचारियों के वेतन आदि पर 156.60 लाख रुपये तथा क्रय किये गये वाहनों/उपकरणों के अनुरक्षण, मरम्मत, कार्यालय व्यय/रख-रखाव, सेल हेतु टेलीफोन आदि विभिन्न मदों पर 290.40 लाख रुपये अर्थात कुल राजस्व व्यय 950 लाख रुपये प्रस्तावित है। प्रस्तावित कुल पूंजीगत एवं राजस्व व्यय 25 करोड़ रुपये का अनुमोदन किया गया। परिवहन आयुक्त द्वारा मनाये गये ‘नो एक्सीडेंट डे’ तथा ‘नो एक्सीडेंट स्ट्रेच’ की भांति जिलाधिकारी अपने क्षेत्रों में ऐसे डे/स्ट्रेच मनाने की कार्यवाही करें, जिससे दुर्घटना कम हो सकें।
बैठक में प्रमुख सचिव परिवहन श्री कुमार अरविन्द सिंह देव, प्रमुख सचिव आबकारी श्री अराधना शुक्ला, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्री अरविन्द कुमार, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा श्री डिम्पल वर्मा सहित लोक निर्माण विभाग, गृह विभाग, स्वास्थ्य विभाग, वित्त, शिक्षा, परिवहन विभाग आदि अनेक विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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