kashmir_gogoi

 

नई दिल्ली। भारतीय सेना में मेजर लितुल गोगोई ने आज पहली बार कश्मीरी युवक को जीप के बोनट से बांधे जाने की पूरी वजह बताई.  मेजर ने उस दिन के पूरे हालात को बयां किया जिस दिन कश्मीरी युवक फारुक अहमद डार को सेना की जीप के बोनट से बांधकर लाया गया था. इस घटना के सामने आने के बाद खास विवाद छिड़ा था, लेकिन सेना और सरकार ने मेजर का पूरी तरह बचाव किया था. आज मेजर गोगोई ने बताया कि किस तरह की मुश्किलों का सामना उनकी टीम को करना पड़ा. मेजर ने कहा कि अगर युवक को जीप के बोनट से बांधने का फैसला नहीं लिया जाता तो वहां के लोग और पूरी टीम मुश्किल में पड़ जाती.

मेजर गोगोई ने बताया, हमारी टीम को श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव के दौरान बडगाम में एक मतदान केंद्र पर वहां तैनात टीम को बाहर सुरक्षित निकालने के लिए भेजा गया था. जब हम वहां पहुंचे तो लोग हम पर पत्थर बरसाने लगे. महिलाएं और बच्चे भी पत्थर बरसा रहे थे. लोग छतों से हम पर पत्थर बरसा रहे थे. मैंने बार बार वार्निंग दी. हमें निकलने में भी परेशानी हो रही थी. उनमें से एक युवक भीड़ का नेतृत्व कर रहा था, जब हम उसकी तरफ गए तो वह भागने लगा. हमने उसे पकड़ लिया. पता चला कि उसका नाम फारुक अहमद डार है.

हम मतदान केंद्र पर पहुंचे तो देखा कि लोग वहां आग लगाने वाले थे. जानकारी मिली थी कि 1200 लोग मतदान केंद्र को घेरे हुए थे, हमारी टीम ने इन लोगों को रोका. पोलिंग स्टेशन में हमने 9 जवानों को निकाला. वापसी पर हम पर फिर पत्थर बरसाए गए. हम पर पेट्रोल बम भी फेंके जा रहे थे. तब हमने पत्थरबाज फारुक को पकड़कर जीप से बांध दिया जिससे कई जवानों की जान बच गई. इसकी वजह से हम वहां से निकल सके. अगर ऐसा नहीं करते तो स्थानीय लोगों पर भी खतरा होता. मेरे जूनियरों ने कहा कि अब फायरिंग करनी पड़ेगी तभी हम जिंदा निकल सकेंगे, लेकिन मैंने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

मेजर को किया सम्मानित

9 अप्रैल को कश्मीर के बडगाम में एक कश्मीरी युवक को जीप के बोनट पर बांधकर ले जाने वाले इस मेजर को आर्मी चीफ जनरल विपिन रावत ने सम्मानित किया. मेजर नितिन गोगोई ने पत्थरबाजों से बचने के लिए एक युवक को बोनट से बांधकर घुमाया था. युवक को जीप के बोनट से बांधने से जवानों पर पत्थरबाजी रुक गई थी और पूरी टीम सुरक्षित निकल सकी थी.

इस मामले के सामने आने के बाद जांच बिठाई गई थी. सैन्य अदालत ने मेजर लितुल गोगोई को क्लीन चिट दे दी थी. सेना ने आर्मी कोर्ट ऑफ इंक्वोयरी (सीओआई) द्वारा मामले की जांच कराए जाने का आदेश दिया था. वहीं, पुलिस ने पत्थरबाजी से बचने के लिए सेना के इस मेजर द्वारा एक युवक को जीप के बोनट से बांधने की घटना का केस दर्ज किया था.

सोशल मीडिया पर कश्मीरी युवक फारुक डार को जीप के बोनट पर बांधकर इलाके में घुमाने पर खासा विवाद छिड़ गया था. लेकिन सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मेजर के इस फैसले की सराहना की क्योंकि इससे बड़ी हिंसा को रोकने में काफी हद तक मदद मिली. पिछले महीने 9 अप्रैल को कश्मीरी युवक फारूक अहमद डार को सेना की जीप के आगे बांधे जाने की घटना सामने आई थी. इस घटना का वीडियो क्लिप उमर अब्दुल्ला ने शेयर किया था. यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था और इसके खिलाफ भारतीय सेना की काफी आलोचना भी हुई थी.

उमर ने उस वीडियो के बाद ये वीडियो शेयर किया था जिसमें चुनाव ड्यूटी से लौटे रहे सेना के जवानों पर स्थानीय युवक बदसलूकी और मारपीट कर रहे थे. वीडियो में दिख रहा था कि युवक सेना के जवानों पर मुक्के और लात बरसा रहे थे. लेकिन जवानों ने संयम बरतते हुए किसी तरह की कार्रवाई नहीं की. बाद में पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज किया था.