
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर की हार के बाद पार्टी सुप्रीमो मायावती के तेवर और तीखे हो गए हैं। मायावती अब किसी भी कीमत पर बीजेपी को रोकने के मूड में हैं। जिसको लेकर बसपा विधायकों के साथ अहम बैठक लखनऊ मेंहो चुकी है। सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रही है कि मायावती बैठक में सपा-बसपा गठजोड़ और समन्वय के फैसले पर पार्टी नेताओं से राय लेंगी।
बैठक से पहले ही मायावती ने मीडिया के सामने अपनी मंशा जाहिर कर दी। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि सपा से उनकी पार्टी के गठबंधन में न कोई स्वार्थ है और न ही कोई शर्त। इस गठजोड़ का औपचारिक मकसद बीजेपी को हर हाल में रोकना है।मायावती ने जोर देकर कहा कि समाजवादी पार्टी से उनका गठजोड़ लोकसभा चुनाव 2019 तक जारी रहेगा।
मायावती ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि साढ़े चार साल की सरकार में सिर्फ ड्रामेबाजी ही देखने को मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मायावती ने दलित विरोधी करार दिया।
बसपा सुप्रीमो के मुताबिक अम्बेडकर का नाम लेकर लोग सियासत तो करते हैं, साथ ही दलितों पर अत्याचार करने से बाज नहीं आते। ऐसे लोगों का पर्दाफाश करने की मायावती ने हुंकार भरी।
हाल के दिनों में सपा-बसपा गठजोड़ को लेकर कई बीजेपी नेताओं ने तंज कसे हैं। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने कहा कि वे भाजपाइयों के भड़काने से भड़कने वाली नहीं हैं। उन्होंने जोड़ा कि बीजेपी की अनर्गल बयानबाजी से उन्हें कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है।
बसपा की इस अहम बैठक में राजस्थान और मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों को भी न्यौता दिया गया है। उम्मीद की जा रही है कि सपा के साथ ही कांग्रेस पार्टी से तालमेल को लेकर भी विचार किया जा सकता है।
राज्यसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार की हार के बाद मायावती ने कहा था कि इसका असर सपा के साथ संबंधों पर नहीं पड़ेगा। बता दें कि राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने बसपा उम्मीदवार को अपना समर्थन दिया था, बावजूद इसके बसपा की हार हुई।
इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मायावती के सुर में सुर मिलाया था और बीजेपी के खिलाफ मुकम्मल गठजोड़ की बात कही थी। अखिलेश ने इसमें कांग्रेस का नाम भी लिया था। एक तरह से कहें तो मिशन 2019 को लेकर महागठबंधन की कवायद शुरू हो गई है।
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