
नई दिल्ली: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए आज आरोप लगाया कि वह मजदूरों के अधिकारों को संरक्षण देने वाले श्रम कानूनों को कमजोर करके उनका शोषण करने की योजना पर काम कर रही है। गांधी ने यहां इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के 31वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकारें राजस्थान, गुजरात के बाद अब हरियाणा में जो कानून बना रही हैं उनसे साफ है कि मोदी सरकार ने श्रमिकों पर बहुत बड़ा हमला शुरू कर दिया है।
इस सरकार को लगता है कि श्रम कानून को कमजोर करके मजदूरों को अनुशासित किया जा सकता है और उनसे ज्यादा काम लिया जा सकता है। उन्होंने कहा ‘‘प्रधानमंत्री को लगता है कि भारत का मजदूर बेईमान तथा कामचोर है और उससे सिर्फ लाठी मारकर काम कराया जा सकता है। प्रधानमंत्री जी को एक बात समझ लेनी चाहिए कि भारत का मजदूर न कामचोर है, न ही गैरअनुशासित है। श्रमिक यूनियनों को कमजोर करने और कठोर कानून बनाने से मजदूरों को काम करने के लिए बाध्य किया जा सकता है।’’
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने दावा किया कि प्रधानमंत्री महसूस करते हैं कि श्रम कानूनों को कमजोर करने और श्रमिकों को अनुशासित करने की आवश्यकता है, जिससे कि उन्हें काम करने के लिए मजबूर किया जा सके। मोदी महसूस करते हैं कि ‘रखने और निकाल देने की’ नीति तथा यूनियनों को कमजोर करने से मजदूरों से काम कराया जा सकेगा। राहुल ने कहा, ‘‘मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि हमारे श्रमिक कामचोर या अनुशासनहीन हैं हमारा श्रमिक डरा हुआ है। वह अपने भविष्य को लेकर, अपने बच्चों के भविष्य को लेकर डरा हुआ है। मजदूर इस बात को सोचकर डरा हुआ है कि आज उसके पास जो काम है, वह कल रहेगा या नहीं। क्या कल उसके लिए फैक्टरी गेट खुलेगा।’’
इस बात पर जोर देते हुए कि सरकार को श्रमिकों और उद्योग के बीच ‘‘न्यायाधीश’’ बनना चाहिए, न कि उद्योग का ‘‘वकील’’, राहुल ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री श्रमिकों के मन से डर निकालने में सफल रहे तो भारत जल्द ही चीन से आगे निकल जाएगा। लोगों को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि राजग सरकार की ‘‘श्रम विरोधी और नीरस’’ आर्थिक नीतियों के चलते श्रमिकों का ‘‘असंतोष’’ देश में दो सितंबर को हुई एक दिन की आम हड़ताल से स्पष्ट झलका।
मोदी सरकार पर राहुल ने तब हमला बोला जब इंटक प्रमुख जी संजीव रेड्डी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह श्रमिकों के हितों पर विभिन्न तरह से वार कर रही है। रेड्डी ने कहा कि सरकार ‘‘प्रमाणन के लिए सभी दस्तावेज जमा करने के’’ बावजूद 3.31 करोड़ सदस्यों वाले इंटक को देश के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन संगठन के रूप में मान्यता नहीं दे रही है।