बहराइच से अमरेन्द्र कुमार वर्मा
उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक अमला किस तरह और कितनी तत्परता से आमजन को उनकी मूलभूत सुविधाएं मुहैय्या करता है, किसी को इसकी बानगी देखनी हो तो वह दूर-दराज के गांवों में चला जाये। आपको विकास की एक नई परिभाषा नजर आयेगी। बीते साल बाढ़ में जो रास्ते टूट चुके हैं जिन्हें अब तक नहीं बनाया जा सका है। जिसकी वजह से तमाम ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को अवागमन की तमाम दिक्कतों के बीच जेहन में यह सवाल जरूर उठ रहा है कि आखिर इन रास्तों के दुरूस्त होने में किस बात का इंतजार किया जा रहा है। प्रदेश के बहुप्रभावी बाढग़्रस्त जनपदों में एक बहराइच के मिहिपुरवा ब्लॉक के पास लगभग तीन दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट मे आने के बाद आवागम के कई मार्ग टूट जाने के कारण अवरूद्ध हो गये थे। स्थानीय लोगों व प्रशासन द्वारा तात्कालिक कामचलाऊ मार्ग जरूर तैयार कर लिया गया था। आज लगभग चार महीने बीतने के बाद भी लोगों का आवागमन का साधन वही कामचलाऊ मार्ग ही हैं। बाढ़ मे तबाह सड़कें ठीक न होने के कारण स्थानीय किसानों को अपने गन्ने की ढुलाई में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिला प्रशासन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। बाढ़ के चपेट में आये बिचपरी, गोपिया, लालपुर, जरही, गौरापिपरा, भगडय़िा, सर्राकलां, दरोगापुरवा, बोटनिहाँ, कंजड़वा, सेंगवा, पड़रिया, लौकाही, मटेहीकलां, कुड़वा सहित कई ऐसे गांव हैं जहां आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
बहरहाल, हमारे तंत्र में सरकारी अमला विकास के नाम पर जितना भी कार्य करता है उसमें सबसे पहले अपना ‘हितÓ जरूर साधता है। शायद उसी ‘हितÓ के लिए उचित समय का इंतजार कर रहा प्रशासनिक अमला को आमजन की दिक्कतें अभी नजर नहीं आ रही है। न तो इसका संज्ञान कोई जनप्रतिनिधि ही लेना चाह रहे हैं। अपने चुनावी वायदों का लॉलीपाप थमाकर गायब हो चुके जनप्रतिनिधि शायद अगले चुनाव का इंतजार कर रहे हैं।
https://rashtriyadinmaan.com
