
वित्त और शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में इस पर फैसला लिया गया है। बैठक में एनबीसीसी के अधिकारी भी शामिल थे। कंपनी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सरकार ने सभी प्रोजेक्ट पर रिपोर्ट मांगी है ताकि काम जल्द शुरू किया जा सके। इन प्रोजेक्ट के लिए अलग फंड बनाने पर भी सहमति बनी है। साथ ही कंपनियों की खाली जमीन के व्यवसायिक इस्तेमाल से रकम जुटाने को भी हरी झंडी दी जा चुकी है। एनबीसीसी सूत्रों ने फंड की दिक्कत से इनकार किया है। उनके मुताबिक बैंकों से कर्ज मिल जाएगा।
एनबीसीसी के लिए एक साथ सभी प्रोजेक्ट बनाना संभव न हुआ तो केंद्र दूसरी कंपनियों से भी बोली मंगा सकता है। हालांकि एनबीसीसी की रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर फैसला होगा।
दिल्ली-एनसीआर में करीब 3.25 लाख घर खरीदार आशियाने के इंतजार में हैं। कुछ प्रोजेक्ट आधे बने हैं तो कई में काम तक शुरू नहीं हुआ है। सभी औसतन 5 साल देरी से चल रहे हैं।
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