इसके बाद 2009 के आम चुनावों में भी नीरज शेखर ने बलिया सीट पर अपना दबदबा बरकरार रखा। पर 2014 के चुनाव में मोदी लहर की वजह से नीरज शेखर चुनाव हार गए। इसके बाद समाजवादी पार्टी के टिकट पर नीरज शेखर 2014 के आखिर में राज्यसभा पहुंचे थे। सूत्रों का कहना है कि भाजपा उन्हें उनके इस्तीफे से खाली होने वाली सीट पर उपचुनाव के जरिए वापस राज्यसभा भेज सकती है।
राज्यसभा के सभापति हरिवंश की किताब ‘चंद्रशेखर- द लास्ट आइकन ऑफ आइडियोलॉजकल पॉलिटिस्क’ का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द विमोचन कर सकते हैं। ऐसे माना जा रहा है कि नीरज शेखर इससे पहले भाजपा में शामिल हो जाएंगे। नीरज शेखर उत्तर प्रदेश से नवंबर 2014 को राज्यसभा के लिए चुने गए थे। ऐसे में उनका कार्यकाल नवंबर 2020 तक था।
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