ट्राई ने नेट न्यूतट्रिलिटी को मंजूरी दी, फेसबुक की मुहिम खारिज


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नई दिल्ली, दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इंटरनेट निरपेक्षता का समर्थन करते हुए डाटा शुल्क की दरों में भेदभाव करने पर रोक लगा दी है। इस आदेश के बाद इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियां किसी वेबसाइट, ऐप, कंटेंट आदि के लिए अलग-अलग किस्म के शुल्क निर्धारित नहीं कर पाएंगी। इसका उल्लंघन पर कंपनी को 50 हजार रुपये प्रतिदिन या अधिकतम 50 लाख तक का जुर्माना किया जा सकता है।

ट्राई के चैयरमैन रामसेवक शर्मा ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेस में ट्राई के नए नियमों का ब्यौरा जारी किया। उन्होंने कहा कि यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। जिन उपभोक्ताओं ने पहले से इस प्रकार के पैकेज ले रखे हैं, वे छह महीने तक ही प्रभावी रहेंगे। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर जो भी सामग्री उपलब्ध है, उसके लिए उपभोक्ताओं से अलग-अलग शुल्क नहीं वसूला जा सकता है।

शर्मा के अनुसार सिर्फ आपातकालीन सेवाओं को नए नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है। मसलन, यदि किसी क्षेत्र में बाढ़ आती है और वहां यदि कोई कंपनी कुछ समय के लिए इंटरनेट फ्री देना चाहती है तो दे सकती है। लेकिन इसकी सूचना सात दिनों के भीतर ट्राई को देनी होगी। ट्राई दो साल बाद इन नियमों की समीक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर उनमें बदलाव भी करेगा।

ट्राई ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी सेवा प्रदात्ता को निशुल्क इंटरनेट देने या कम दाम पर इंटरनेट देने से रोका नहीं जा रहा है। लेकिन ऐसा करने वाली कंपनियों को इसे सभी के लिए समान रखना पड़ेगा। कंपनियां इंटरनेट के स्रोर्स, कंटेंट, डेस्टिनेशन और ऐप के आधार पर अलग-अलग दाम तय नहीं कर सकती है। यह पूछने पर कि यदि कोई नेट पर कोई इनोवेटिव आइडिया शुरू होता है और उसके इंटरनेट होने या न होने पर संदेह है, तो ऐसे मामले में ट्राई मामला को अलग से देखेगा।


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