- राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षित ईंधन की आपूर्ति एवं पर्यावरण सुरक्षा होगी सुनिश्चित
- नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यीडा, यूपीसीडा, गीडा, सीडा, लीडा को खुदाई एवं पुनर्स्थापन (Dig & Restore) नीति के तहत गैस पाइपलाइन बिछाने हेतु गैस कम्पनियों को अनुमति व सुविधा देने के हुए आदेश
- वाहनों में प्रदूषण रहित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य के प्रमुख राजमार्गों को ग्रीन एनर्जी काॅरिडोर में किया जाएगा परिवर्तित
- ग्रीन एनर्जी काॅरिडोर हेतु आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बिल्हौर में 4,875 वर्गमी. भूमि की गई चिन्हित
- सीएनजी आपूर्ति के लिए यूपीसीडा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी को देगा सहयोग
- प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन हेतु 35 से अधिक गैस कम्पनियों को किया गया है अधिकृत

लखनऊ | उत्तर प्रदेश में तेजी से विकसित होते हुए उद्योगों तथा मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के दृष्टिगत् राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण एवं उद्योगों को सुरक्षित ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति हेतु दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके अतिरिक्त परिवहन क्षेत्र में प्रदूषण रहित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य के प्रमुख राजमार्गों को ग्रीन एनर्जी काॅरिडोर में परिवर्तित करने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। औद्योगिक विकास,सतीश महाना ने कहा कि राज्य के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में प्राकृतिक गैस के नेटवर्क हेतु पाइपलाइन बिछाने के लिए अधिकृत गैस कम्पनियों को इन प्राधिकरणों द्वारा अनुमति व सुविधा प्रदान करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित इकाइयों को सुरक्षित ईंधन की आपूर्ति एवं पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी तथा यातायात पर भी दबाव कम होगा।
अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, आलोक कुमार ने बताया कि पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के नेटवर्क के विकास हेतु नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा), उ.प्र. राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा), गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा), सथरिया औद्योगिक विकास प्राधिकरण (सीडा) तथा लखनऊ औद्योगिक विकास प्राधिकरण (लीडा) को गैस कम्पनियों को सुविधा प्रदान करने हेतु निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा कि पीएनजी सुरक्षित होने के साथ ही सस्ती भी पड़ती है क्योंकि भण्डारण और परिवहन के व्यय की बचत होती है। ज्ञात हो कि गत् सप्ताह अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग द्वारा उक्त औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों को जारी शासनादेश में नगर विकास विभाग द्वारा अधिसूचित खुदाई एवं पुनर्स्थापन (Dig & Restore) नीति के अन्तर्गत् पेट्रोलियम नेचुरल गैस रेग्यूलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) द्वारा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विकास के लिए भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर सुविधाएं उपलब्ध कराने से सम्बंधित निर्देशों के अनुपालन में औद्योगिक क्षेत्रों में पीएनजी की आपूर्ति हेतु अधिकृत गैस कम्पनियों को अनुमति एवं सुविधाएं प्रदान करने का आदेश दिया गया है। खुदाई एवं पुनस्र्थापन नीति के अन्तर्गत् गैस आपूर्ति के लिए भूमिगत् पाइपलाइन डालने में ऐसी तकनीकों का उपयोग करने की अनुमति दी गई है, जिससे यातायात एवं सामान्य कार्यकलापों में बाधा न पड़े। गैस पाइपलाइन बिछाने अथवा पिट या चैम्बर की स्थापना की अनुमति से पूर्व कम्पनी को बैंक गारण्टी जमा करनी होगी। कम्पनी द्वारा की गई खुदाई एवं पुनस्र्थापना का कार्य संतोषजनक होने पर अनापत्ति-प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा तथा इसके एक माह के भीतर बैंक गारण्टी वापस कर दी जाएगी।
श्री आलोक कुमार ने बताया कि इसी प्रकार परिवहन हेतु वाहनों में प्रदूषण रहित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य के प्रमुख राजमार्गों को ग्रीन एनर्जी काॅरिडोर में परिवर्तित करने के कार्यक्रम के तहत यूपीसीडा को निर्देश दिए गए हैं कि प्राधिकरण अपने क्षेत्र में कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की आपूर्ति हेतु सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी को आवश्यक सुविधाएं स्थापित करने में सहयोग प्रदान करे। इस सम्बंध में उ.प्र. एक्सप्रेसवेज़ औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा सूचित किया गया कि ग्रीन एनर्जी काॅरिडोर हेतु आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बिल्हौर में 4,875 वर्गमी. भूमि चिन्हित की गई है।उल्लेखनीय है कि नगर विकास विभाग द्वारा प्रदेश के 15 प्रमुख नगरों में 1,525 सीएनजी बसें संचालित करने का निर्णय किया गया है, जबकि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन हेतु लगभग 37 गैस कम्पनियों को अधिकृत किया गया है।
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