नई आबकारी नीति 2021-22 से भ्रष्टाचार कम होगा — दिल्ली सरकार


नई दिल्ली | दिल्ली सरकार ने गुरुवार को हाई कोर्ट में कहा कि नई आबकारी नीति 2021-22 भ्रष्टाचार को कम करने में सहायक होने के साथ-साथ इससे शराब के कारोबार में पादर्शिता और उचित प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा। ‌सरकार ने अपनी नीति का बचाव करते हुए कहा कि इसको लेकर जो आशंकाएं है, वह दुखद है।

मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष सरकार ने कहा कि इस नीति को लेकर उस पर व्यापक हमला हुआ है और वह अपना रुख स्पष्ट करने के लिए विस्तृत जवाब दाखिल करेगी। सरकार ने नई आबकारी नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में पीठ के समक्ष यह दलील दी। उच्च न्यायालय पहले ही आबकारी नीति पर रोक लगाने या इसके तहत निविदा के लिए आवेदन करने की 20 जुलाई की समय सीमा बढ़ाने पर कोई आदेश पारित करने से इनकार कर चुकी है। हालांकि नोटिस जारी कर केंद्र व दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने कहा है कि नई आबकारी नीति के तहत दिल्ली को 32 जोनों में विभाजित किया गया है, लेकिन इसके लिए सिर्फ 16 प्लेयर्स/लाइसेंस धारकों को अनुमति दी जा सकती है और इससे एकाधिकार हो जाएगा। इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसा नियंत्रण जनहित में है न कि उन लोगों के लिए जो शराब के कारोबार में शामिल हैं। इतना ही नहीं, पीठ ने कहा कि नीति में यह नियंत्रण लोक कल्याण के लिए है, न कि आपके (शराब कारोबरियों) के  व्यवसाय को चलाने के लिए। साथ ही कहा कि यह बड़े पैमाने पर जनता के लिए है और यह आपके लिए अपना व्यवसाय चलाने या आपको मुश्किल में डालने के लिए नहीं है।’


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