
नई दिल्ली. राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार राम नाथ कोविंद पर नीतीश की पार्टी जेडीयू ने अपने पत्ते खोल दिए हैं. नीतीश कुमार ने जेडीयू विधायकों-सांसदों से कोविंद के पक्ष में वोट करने को कहा है. राष्ट्रपति पद के लिए कोविंद के नाम के ऐलान के बाद से ही सत्ताधारी और विरोधी दलों की नजरें जेडीयू पर थी. नीतीश ने विपक्षी दलों को दरकिनार कर कोविंद को समर्थन देने का फैसला लिया है.
नीतीश का ये फैसला बिहार में उनके सहयोगियों को माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा सकता है. बिहार में नीतीश की पार्टी कांग्रेस और लालू की आरजेडी के साथ गठबंधन से सरकार चला रही है. दोनों ही दल विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार को उतारने की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में नीतीश का ये फैसला विपक्ष की रणनीति को और कमजोर करने का काम कर सकता है.
एनडीए उम्मीदवार के तौर पर नाम का ऐलान होने के बाद ही कोविंद को टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस और बीजेडी का समर्थन मिल गया था. ये तीनों ही दल गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेस धड़े में गिने जाते हैं. एनडीए अपनी जीत को और बड़ा करने के लिए लगातार विरोधी दलों से समर्थन की अपील कर रहा है. यूपी में बीएसपी सुप्रीमो भी इशारों इशारों में कोविंद को समर्थन का ऐलान कर चुकी हैं. कोविंद दलित हैं और मायावती के लिए उन्हें दरकिनार कर विपक्ष के उम्मीदवार का समर्थन कर पाना भी आसान नहीं होगा.
बीजेपी और एनडीए पहले ही बड़ी जीत की तरफ थी लेकिन अब नीतीश की पार्टी जेडीयू के समर्थन के बाद राष्ट्रपति चुनाव में विरोधी मोर्चे के लिए उम्मीदवार उतारना सिर्फ सम्मान बचाए रखने की कोशिश से बढ़कर कुछ नहीं होगा.
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