
खरीदारों का कहना है कि 13 साल बाद कब्जा दिए जाने का रिकार्ड बनेगा। बिल्डर की इस हेराफेरी के विरोध में रविवार को खरीदार परियोजना साइट पर इकठ्ठा हुए और प्रदर्शन किया। लोगों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को 500 ट्विट कर विरोध जताया। इसके अलावा सरकार, प्राधिकरण और बिल्डर के बीच शटल कॉक की तरह इस्तेमाल हो रहे खरीदारों को लेकर बैंडमिटन खेलकर विरोध जताया। खरीदारों ने ये हैं अच्छे दिन पर कटाक्ष करते हुए हंसकर भी विरोध किया। भूख हड़ताल शुरू करेंगे खरीदारप्रदर्शन के बाद खरीदारों ने पांच तरीके से बिल्डर को घेरने की रणनीति तैयार की है। पहला, पांच सितंबर को बिल्डर के खिलाफ कोर्ट जाएंगे। दूसरा, आर्थिक अपराध शाखा में एक सप्ताह के अंदर इसकी शिकायत करेंगे। तीसरा, 15 सितंबर से पहले बिल्डर के खिलाफ मामला दर्ज कराएंगे। चौथा, 11 से 20 सितंबर तक परियोजना स्थल पर भूख हड़ताल शुरू करेंगे। पांचवां, 14 सितंबर को आ रहे मंत्रियों से समस्याओं को लेकर खरीदारों का एक प्रतिनिधिमंडल मिलेगा। चार दिन में कैसे खड़ी गईं इमारतबिल्डर ने इन परियोजनाओं का काम शुरू करने की प्रस्तावित तारीख 30 अगस्त 2017 दी है। ऐसे में सवाल यह है कि चार दिन में ही इन परियोजनाओं की बड़ी-बड़ी इमारतें कैसे खड़ी हो गईं।पहले बुकिंग की अपने नाम पर अब पल्ला झाड़ रहा है
आम्रपालीइन परियोजनाओं की बुकिंग आम्रपाली बिल्डर ने आम्रपाली हार्ट बीट सिटी परियोजनाओं के नाम से की थी। बिल्डर-खरीदार समझौते से संबंधित जो कागजात खरीदारों को दिए गए, उसमें भी आम्रपाली के सील हुए सेक्टर-62 स्थित दफ्तर का पता है। अब आम्रपाली इन परियोजनाओं से पल्ला झाड़ रहा है। कंपनी के निदेशक शिवप्रिया का कहना है कि इन परियोजनाओं से अब हमारा कोई संबंध नहीं हैं। पेबलेस व प्लेटिनियम कंपनी के नाम से हैं अब ये परियोजनाएंअब हार्ट बीट सिटी-1 परियोजना का निर्माण थ्री प्लेटिनियम सॉफटेक प्राइवेट लिमिटेड करा रहा है। हार्ट बीट सिटी-2 परियोजना का निर्माण पेबलेस प्रोलीज प्राइवेट लिमिटेड करा रही है। इस सप्ताह सीज हो सकती हैं यह परियोजनाएंवाणिज्यकर का इन दोनों परियोजनाओं पर 68 करोड़ बकाया है। बकाए का भुगतान नहीं होने के कारण विभाग इन परियोजना को सीज/कुर्की करने का निर्णय ले चुका है।
अधिकारियों का कहना है कि बकाया नहीं मिलने पर इस सप्ताह विभाग कार्रवाई कर सकता है।छह साल से फ्लैट का इंतजार करते-करते पहले ही हिम्मत टूट चुकी थी। अब 2023 तक का समय बढ़ा बिल्डर ने फ्लैट पाने के सपने ही तोड़ दिए। पंजीकरण में की गई बिल्डर की इस हेराफेरी के खिलाफ रेरा को कार्रवाई करनी चाहिए।
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