सावन के पहले सोमवार पर दूधिया रोशनी से नहाए शिवालय, हर ओर लगे जयकारे


 

आज सावन माह का पहला सोमवार है। सुबह से ही देश भर के मंदिरों के शिवालय में भक्त भगवान शिव की पूजा अर्चना में जुटे हुए हैं। शिव भक्त जल और दूध से शिवलिंग का अभिषेक कर रहे हैं। महादेव को बेलपत्र, भांग और धतूरा चढ़ाकर प्रसन्न कर रहे हैं। सावन माह में सोमवार व्रत और सावन स्नान की परंपरा है। भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करना अति फलदायी माना गया है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। सावन में सोमवार के दिन व्रत रखना शुभ फलदायी माना जाता है।

पंडित ऋषिकेश बताते हैं कि महादेव को बेलपत्र प्रिय है। शिवभक्त शिवलिंग पर बेलपत्र-भांग और धतूरे का फूल अर्पित करते हैं। जल और दूध से अभिषेक होता है, लेकिन शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से जीवन में सभी तरह की सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। बताया कि इस दिन भगवान शंकर के सामने तिल के तेल का दीया जलाना चाहिए।

औघड़नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित श्रीधर त्रिपाठी ने बताया कि श्रावण मास भगवान शिव की भक्ति को समर्पित है। उन्होंने बताया कि सोमवार को महादेव की स्तुति का विशेष फल मिलता है। हिंदू धर्म ग्रंथों के मुताबिक सावन का महीना भगवान शिव के अलावा मां पार्वती की पूजा-आराधना के लिए भी सर्वेत्तम है। शादीशुदा महिलाएं अपने आगामी जीवन को सुखमय बनाने के लिए उनकी प्रार्थना करती हैं वहीं दूसरी तरफ कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति हेतु शिव पार्वती की पूजा करती हैं। महादेव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त पूरे मन से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करता है उस पर शिव पार्वती की असीम अनुकंपा होती है।

सावन के पहले सोमवार को इत्रनगरी बम बम भोले के जयकारों से गूंज उठी। पूरे जिले के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। सुबह से ही भक्तों ने मंदिर में पहुंचकर शिवलिंग का जलाभिषेक किया। खासकर शहर के सिद्धपीठ बाबा गौरी शंकर और चौधरियापुर स्थित बाबा विश्व नाथ मंदिर में भक्तो की खासी भीड़ उमड़ रही हैं। शिवालय हर-हर महादेव और बम बम भोले के जयकारे से गूंज रहे।


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