
मोदी ने कहा कि फलस्तीन की तरह भारत भी युवाओं का देश है। उन्हें यहां के युवाओं से भी वही उम्मीदें हैं जो भारत के युवाओं से हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा हमारा भविष्य और उत्तराधिकारी हैं। इसलिए, दोनों देशों के बीच ज्ञान और विज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए हर साल इस उद्देश्य से एक-दूसरे के यहां आने-जाने वाले छात्रों की संख्या 50 से बढ़ाकर 100 की जाएगी। मोदी ने कहा कि फलस्तीन के साथ भारत का सदियों पुराना संबंध है और वर्तमान में भी भारत के लिए फलस्तीन का विशेष महत्व है। बेहतर कल के लिए दोनों देशों के बीच परस्पर सहयोग को मजबूत किया जाना आवश्यक है और इसके लिए ढांचागत विकास, तकनीकी, वित्त प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, संरचना विकास जैसे क्षेत्रों में एक दूसरे का सहयोग जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इस क्रम में रामल्ला में टेक्नोलॉजी पार्क परियोजना शुरू की गई है और उस पर तेजी से काम चल रहा है। इसके साथ ही भारत यहां बन रहे राजनयिक संस्थान की स्थापना में भी सहयोग कर रहा है। यह संस्थान विश्व स्तर का होगा। परस्पर सहयोग के कार्यक्रमों के जरिए न सिर्फ संबंध मजबूत होंगे, बल्कि रोजगार के अवसर खुलेंगे और युवाओं के सुनहरे भविष्य का सपना पूरा हो सकेगा। दोनों देशों के बीच कौशल विकास और निवेश को बढावा देने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फलस्तीन के लोगों ने कठिन समय में चुनौतियों का बखूबी मुकाबला किया है। यहां के लोगों ने विपरीत परिस्थितियों में अपने विकास के लिए अपनी ऊर्जा और क्षमता का जिन चुनौतियों के साथ इस्तेमाल किया है वह सरहानीय है।
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