
दिल्ली | केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की संभावना को सोमवार को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई भी कदम नुकसानदायक हो सकता है. उन्होंने कहा कि नागरिक अपने हिस्से के करों का ईमानदारी से भुगतान करें, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों पर राजस्व के श्रोत के रूप में निर्भरता कम हो सके.
अरुण जेटली ने सोमवार को फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा कि सिर्फ वेतनभोगी वर्ग ही अपने हिस्से का कर अदा करता है. ज्यादातर अन्य लोगों को अपने कर भुगतान के रिकॉर्ड को सुधारने की जरूरत है. यही वजह है कि भारत अभी तक एक कर अनुपालन वाला समाज नहीं बन पाया है. फेसबुक पोस्ट में जेटली ने लिख, ‘मेरी राजनीतिज्ञों और टिप्पणीकारों से अपील है कि गैर-तेल कर श्रेणी में चोरी रुकनी चाहिए. यदि लोग ईमानदारी से कर अदा करेंगे तो कराधान के लिए पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता को कम किया जा सकेगा.
बहरहाल, मध्य से दीर्घावधि में राजकोषीय गणित में कोई भी बदलाव प्रतिकूल साबित हो सकता है.’ उल्लेखनीय है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ जनता में आक्रोश है. हालांकि लोगों को उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मोदी सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटाएगी. केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली के इस बयान से लोगों की उम्मीदों को झटका लगा है.
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