जीडीए में लैंडपूल पॉलिसी के बदलाव की तैयारी, शासन को भेजे 3 सुझाव


lucknow |  गाजियाबाद में लैंडपूल पॉलिसी को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए इसमें थोड़ा बदलाव किए जाने की तैयारी की जा रही है। शासन ने गाजियाबाद प्राधिकरण से लैंडपूल पॉलिसी के बारे में सुझाव मांगे हैं। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने किसानों से बातचीत कर तीन सुझाव शासन को भेज दिए। इसमें से किसानों ने जीडीए से विकसित जमीन में मिक्स लैंड यूज सहित तीन प्रमुख मांग रखी। इस पॉलिसी के तहत राजनगर एसक्टेशन के पास ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किया जाना है।

जमीन अधिग्रहण को लेकर अक्सर प्राधिकरण और किसानों के बीच टकराव की नौबत रहती है। मुआवजे के लिए अधिकारियों को किसानों का विरोध भी झेलना पड़ता है। इतना ही नहीं, कई बार अधिकारियों पर तमाम तरह के आरोप भी लगते हैं। इससे निपटने के लिए शासन ने प्राधिकरणों में लैंडपूल पॉलिसी लागू करने की योजना बनाई। इसमें किसानों की सहमति से जमीन लेकर उसे विकसति किया जाएगा। किसानों की सहमति नहीं होने पर जमीन खरीदी नहीं जाएगी। इस योजना के तहत राजनगर एक्सटेंशन में ईस्टन पेरिफेरल रोड के पास ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किया जाना है। इसके लिए करीब 55 एकड़ जमीन चाहिए। जीडीए ली जाने वाली कुल जमीन में से 45 प्रतिशत जमीन पार्क, रास्ता, ग्रीन ब्लैट आदि के लिए छोड़ेगा। जीडीए शेष 55 प्रतिशत विकिसित जमीन में से किसानों को 25 प्रतिशत जमीन देगा।

प्राधिकरण 30 प्रतिशत जमीन ट्रांसपोर्ट नगर में सड़क बनाने, बिजली खर्च और सीवर लाइन और वॉटर सप्लाई पर आने वाले खर्च में समायोजित करेगा। लेकिन किसानों की आपत्ति के चलते यह योजना फिलहाल परवान नहीं चढ़ रही है। दरअसल, जीडीए ने ट्रांसपोर्ट नगर के लिए कुछ दिनों पहले आपत्ति और सुझाव मांगे थे। इसमें काफी आपत्तियां आई। किसानों ने पॉलिसी को सफल बनाने के लिए कई सुझाव रखे। प्राधिकरण ने किसानों के सुझाव शासन को भेज दिया। बताया जा रहा है कि किसानों के तीन सुझावों पर गौर की जा रही है। इसके देखते हुए लैंडपूल पॉलिसी में बदलाव करने की तैयारी की जा रही है। जीडीए वीसी ने बताया कि प्रदेश सरकार से लैंड पूल पॉलिसी के फाइनल होने के बाद ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने के लिए जमीन का चिह्नीकरण का कार्य फाइनल होगा।

 

जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने बताया कि मुख्य रूप से तीन तरह की आपत्तियां मिली। किसानों ने सुझाव दिया कि न्यूनतम कितनी जमीन योजना में शामिल होने पर दुकान मिलेगी। मिक्स लैंड यूज की इजाजत दी जाए। तीसरी मांग रखी कि जब तक ट्रांसपोर्ट नगर बसेगा तब तक फसल से होने वाली आय की भरपाई जीडीए को करनी होगी।मोरटा-मोरटी के पास विकसित होगा जीडीए का प्रयास है कि राजनगर एक्सटेंशन के पास ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किया जाए। नॉर्दन पेरिफेरल रोड के दोनों और ट्रांसपोर्ट राजनगर एक्सटेंशन में विकसित किया जाएगा। ट्रांसपोर्ट नगर मोरटा और मोरटी गांव की जमीन पर विकसित किया जाएगा। यहां इसलिए बनाया जा रहा है कि क्योंकि भारी वाहन यहीं से निकलते हैं। भारी वाहन शहर के अंदर नहीं आ सकेंगे।शहीदनगर में बना है पहला ट्रांसपोर्ट नगरयूपी बॉर्डर के पास शहीद नगर में पहला ट्रांसपोर्ट नगर है। इसे वहां 1960 में विकसित किया गया था। अब वहां भीड़भाड़ वाला इलाका हो गया। अधिक भीड़ होने के चलते लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। यही वजह है कि दूसरा ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने की योजना है।


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