प्रधानमंत्री मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल किया राष्ट्र को समर्पित, कहा- शहीद हुए हर सपूत को नमन


नई दिल्ली |प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज(25 फरवरी) इंडिया गेट पर बने देश के पहले नेशनल वॉर मेमोरियल का उद्घाटन कर इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया। 40 एकड़ में फैले इस मेमोरियल के निर्माण पर करीब 180 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यहां स्मारकों के साथ संग्रहालय भी बनाया गया है। दोनों के बीच एक सब-वे भी रखा है। इसके अलावा नेशनल वॉर मेमोरियल में दीवारों पर 29,942 शहीदों के नाम भी लिखे गए हैं। इसके उद्घाटन के बाद पीएम ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए निम्न बातें कहीं…

कहीं ये बातें
आज हमारी सेना दुनिया के सबसे शक्तिशाली सेनाओं में से एक है
हर ईंट पर एक शहीद का नाम लिखा है
‘आप सभी भूतपूर्व नहीं अभूतपूर्व हैं’, क्योंकि आज लाखों सैनिकों के शौर्य और समर्पण के कारण हमारी सेना सबसे बड़ी सेना में से एक है
हमारे देश पर चाहे संकट दुश्मनों के कारण आया हो या प्राकृतिक कारणों से, सेना ने अपने ऊपर सबसे पहले प्रहार लिया
जब लता दीदी ने ऐ मेरे वतन के लोगों गाया तो पूरे देश की आंखें नम हो गईं।
आज बॉर्डर पर डटे हर वीर और वीरांगना को नमन करता हूं
भारत अगर आज मजबूती से बढ़ रहा है तो वह आपकी वजह से है
इस स्मारक में हजारों सैनिकों के नाम अंकित हैं।
राष्ट्रीय वॉर मेमोरियल की मांग कई दशकों से हो रही थी लेकिन कुछ ठोस नहीं हो पाया।
हमारी सरकार ने समय से पहले इस वॉर मेमोरियल को बना दिया।
वन रैंक वन पेंशन स्कीम से सैनिकों के पेंशन में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
पहले की सरकारों के समय आपको संघर्ष करना पड़ा।
वन रैंक वन पेंशन स्कीम के तहत 35 हजार करोड़ रुपए अब तक वितरित किए जा चुके हैं।
देश की सुरक्षा के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ किया गया इसका अंदाजा इस बात से लगाईए कि साल 2009 में सेना ने 1 लाख 86 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट की मांग की थी। 2009 से लेकर 2014 तक पांच साल बीत गए, लेकिन सेना के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं खरीदी गई। यह हमारी ही सरकार है जिसने बीते साढ़े चार वर्षों में 2 लाख 30 हजार से ज्यादा बुलेट प्रूफ जैकेट खरीदी है।
पहले की सरकार चलाने वालों का रवैया सेना के प्रति कैसा रहा ये आप मुझसे ज्यादा बेहतर जानते हैं।
सेना को सशक्त करने के लिए हमने हेलिकॉप्टर फाइटर प्लेन, अत्याधुनिक राइफल, पनडुब्बी आदि सब खरीदे।
लेकिन  लोगों ने रफाल पर सवाल उठाए।
सेना और देश की सुरक्षा को उन लोगों ने अपनी कमाई का साधन बना लिया था। शायद शहीदों को याद करके उन्हें कुछ मिल नहीं सकता था, इसलिए उन्हें भुलाना ही उन्हें आसान लगा।
देश की सुरक्षा के लिए समाज के हर वर्ग से लोग आगे आएं यह जरूरी है। इस विचार के साथ पहली बार महिलाओं को भी फाइटर पायलट बनने का मौका मिल रहा है। अपने पुरुष फौजी साथियों की तरह अब महिलाओं को भी सेना में स्थाई सर्विस कमीशन मिलने लगा है।
हमारे प्रयासों में दुनिया के बड़े-बड़े देश हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहते हैं। यही कारण है कि 2016 में हमारे इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में 50 देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था। यही कारण है कि एक के बाद एक देश हमारे साथ रक्षा सहयोग के समझौते करना चाहते हैं।
मोदी याद रहे न रहे लेकिन देश करोड़ों सैनिकों की वीरता और समर्पण त्याग याद रहना ही चाहिए।
आपके सामने एक ऐसी मजबूत सरकार है जिसे आपका सम्मान करना आता है। आपका प्रधानसेवक राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए काम करेगा।
मैं आपकी राह में आए हुए हर रोड़े से लड़ने के लिए तैयार हूं।
मैं इस वार मेमोरियल के लिए देश के लिए बलिदान देने वाले और त्याग करने वाले हर किसी शख्स को नमन करता हूं।


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