जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के दूसरे सबसे बडे बांध का उद्घाटन करेंगे


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अहमदाबाद: रविवार को अपने 67वें जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी नर्मदा नदी पर बने दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सरदार सरोवर डैम का उद्घाटन करेंगे. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 56 साल पहले इसकी नींव रखी थी.
नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने 17 जून को बांध के 30 दरवाजे बंद कर दिए थे ताकि 138.68 मीटर तक पूरा पानी भर सके जो पहले 121.92 मीटर था. इसके अलावा पानी की भंडारण क्षमता को भी बढ़ाया गया है. डैम में पहले 1.27 मिलियन क्यूबिक मीटर जमा हो सकता था लेकिन अब 4.73 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा हो सकता है.
माना जा रहा है कि इस डैम से चार राज्य- गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश को फायदा पहुंचेगा. सरदार सरोवर डैम की वेबसाइट  http://www.sardarsarovardam.org/  के मुताबिक इसकी ऊंचाई 163 मीटर और लंबाई 1210 मीटर है. इस बांध में 30 दरवाजे हैं और हर दरवाजे का वजन करीब 450 टन हैं और इसे बंद करने में कम से कम एक घंटा लगता है.

 

बांध की खासियत
सरदार सरोवर बांध में 4.73 मिलियन क्यूबिक पानी जमा करने की क्षमता है. ये बांध अबतक अपनी लागत से दोगुनी यानी 16000 करोड़ रूपये की कमाई कर चुका है. बांध की क्षमता और क्षेत्रफल के लिहाज से बांध अमेरिका के ग्रांट कुली के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है. डैम को 1000 वॉट के 620 एलईडी बल्बों से सजाया गया है जिनमें से 120 बल्ब बांध के 30 गेटों पर लगे हैं. इनकी रौशनी से बांध में पानी के ओवरफ्लो का पता लगता है.
इस बांध को बनाने में 86.20 लाख क्यूबिक मीटर कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है. इस डैम का सबसे ज्यादा फायदा गुजरात को मिलेगा. डैम खुलने के बाद गुजरात के 15 जिलों के 3137 गांवों की 18.45 लाख हैक्टियर जमीन को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा.
इसके अलावा इस बांध से राजस्थान के सूखाग्रस्त बारमेड़ और जालौन जिले की 2.46.000 हैक्टियर जमीन को पानी मिलेगा साथ ही महाराष्ट्र के आदिवासी इलाके की 37,500 हैक्टियर जमीन तक पानी पहुंचेगा.
बांध से बनेगी 6000 मेगावॉट बिजली
इसके अलावा बांध से 6000 मेगावॉट बिजली पैदा होगी. बिजली का 57 फीसदी हिस्सा मध्य प्रदेश को मिलेगा. इसके अलावा महाराष्ट्र और गुजरात को भी 27 फीसदी और 16 फीसदी बिजली मिलेगी. इस परियोजना से 18 लाख हेक्टेयर जमीन को फायदा होगा और नहरों के जरिए 9000 गांवों में सिचाई की जा सकेगी.

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