मुख्यमंत्री ने रिन्यूबल इनर्जी इन्वेस्टर्स मीट एण्ड एक्सपो-2020 (थर्ड आर0ई0-इन्वेस्ट) को सम्बोधित किया
मुख्यमंत्री कार्यक्रम में जनपद गोरखपुर से वर्चुअल माध्यम से सम्मिलित हुए

लखनऊ | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ऊर्जा का उत्पादन एवं खपत विकास का मुख्य आधार है। ऊर्जा का उपयोग कृषि, उद्योग, ट्रांसपोर्ट, रोजगार सृजन आदि सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होता है। उत्तर प्रदेश मानवशक्ति और भौगोलिक रूप से देश के अग्रणी राज्यों में सम्मिलित है। प्रदेश में सौर एवं बाॅयोफ्यूल के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन की अपार सम्भावनाएं हैं। राज्य सरकार प्रदेश के विकास और औद्योगिकीकरण के लिए अक्षय ऊर्जा विशेषकर सौर एवं बाॅयोफ्यूल ऊर्जा की सम्भावनाओं को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री आज नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा रिन्यूबल इनर्जी इन्वेस्टर्स मीट एण्ड एक्सपो-2020 (थर्ड आर0ई0-इन्वेस्ट) को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री कार्यक्रम में जनपद गोरखपुर से वर्चुअल माध्यम से सम्मिलित हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन में निजी भागीदारी को बढ़ावा दिये जाने के उद्देश्य से ‘सौर ऊर्जा नीति-2017’ प्रख्यापित की गयी है। उन्होंने कहा कि इस नीति में ओपेन एक्सेस के द्वारा थर्ड पार्टी विक्रय, कैप्टिव उपयोगार्थ सोलर पावर परियोजनाओं की स्थापना एवं सोलर पार्क जिसमें एक साथ कई सौर पावर परियोजनाओं की स्थापना की जा सकती है, के विकास का प्राविधान किया गया है। नीति के अंतर्गत वर्ष 2022 तक 10,700 मेगावाॅट क्षमता की सौर विद्युत परियोजनाओं की अधिष्ठापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 6,400 मेगावाॅट यूटीलिटी स्केल सौर विद्युत परियोजनाओं एवं 4,300 मेगावाॅट रूफटाॅप सोलर पावर प्लाण्ट की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की ‘सौर ऊर्जा नीति-2017’ के अन्तर्गत आॅनलाइन सिंगल विण्डो क्लियरेंस, सोलर पावर परियोजनाओं की स्थापना हेतु भूमि पर 100 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी में छूट, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 10 वर्ष के लिए शत-प्रतिशत छूट, सोलर पावर परियोजनाओं हेतु पर्यावरण क्लियरेंस लिये जाने की छूट, थर्ड पार्टी को पावर सेल की अनुमन्यता, जिसमें पावर सेल पर इन्ट्रा-स्टेट में व्हीलिंग ट्रांसमिशन चार्जेज पर 50 प्रतिशत तथा इन्टर-स्टेट पर 100 प्रतिशत की छूट आदि प्रोत्साहनों का प्राविधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा नीति के अन्तर्गत 535 मेगावाॅट क्षमता की सौर पावर परियोजनाएं ओपेन एक्सेस के अन्तर्गत तृतीय पार्टी विक्रय अथवा कैप्टिव उपयोगार्थ स्थापना हेतु आवंटित की गयीं। इनमें से 70 मेगावाॅट क्षमता की परियोजनाओं की कमीशनिंग हो गयी है। अवशेष की कमीशनिंग मार्च, 2021 तक की जानी है। ओपेन एक्सेस के अन्तर्गत तृतीय पार्टी सेल/कैप्टिव उपयोगार्थ 900 मेगावाॅट क्षमता की परियोजना के आवंटन की कार्यवाही गतिमान है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि एम0एन0आर0ई0, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019-20 में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पी0एम0 कुसुम योजना) प्रारम्भ किया गया है। पी0एम0 कुसुम योजना के कम्पोनेट-बी के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019-20 हेतु 8,000 सोलर पम्प का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष स्थापना कार्य कराया जा रहा है। योजना के क्रियान्वयन हेतु शासन द्वारा कृषि विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पी0एम0 कुसुम योजना के कम्पोनेन्ट-सी के अन्तर्गत निजी ग्रिड संयोजित नलकूपों का सौर ऊर्जीकरण करते हुए नेट मीटरिंग के माध्यम से अतिरिक्त सौर ऊर्जा उत्पादन का लाभ देकर कृषकों की आय में वृद्धि का भी प्राविधान है। किसान, सिंचाई के उपरान्त अतिरिक्त उत्पादित विद्युत का विक्रय राज्य की विद्युत वितरण कम्पनी को कर सकेंगे। इस योजना के अन्तर्गत वर्ष 2022 तक 20,000 निजी नलकूपों का सौर ऊर्जीकरण किये जाने का लक्ष्य है। ग्रिड कनेक्टेड सोलर रूफटाॅप पावर प्लाण्ट लगाये जाने का प्राविधान भी किया गया है। अब तक प्रदेश में कुल 229 मेगावाॅट क्षमता के ग्रिड कनेक्टेड सोलर रूफटाॅप पावर प्लाण्ट की स्थापना करायी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जैव ऊर्जा प्रोत्साहन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके अन्तर्गत बायोफ्यूल से संबंधित उद्यम की स्थापना पर 15 से 25 प्रतिशत वित्तीय उपादान, 10 वर्षों तक एस0जी0एस0टी0 की प्रतिपूर्ति तथा भूमि क्रय पर स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जा रही है। योजना के अन्तर्गत अब तक बायो फ्यूल उत्पादन के उपयुक्त 14 प्रस्तावों की स्वीकृति दी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सौभाग्य योजना’ के अन्तर्गत प्रदेश के ऐसे सभी घरों को सौर ऊर्जा के माध्यम से विद्युतीकृत किया जाना है, जिन्हें ग्रिड लाइन से विद्युतीकृत किया जाना संभव नहीं है। लगभग 01 लाख घरों को सोलर पावर पैक के माध्यम से विद्युतीकृत किये जाने का लक्ष्य है। योजना के अन्तर्गत 44,760 घरों में सोलर पावर पैक स्थापित किये जा चुके हैं। प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल एवं विद्युत की सुविधा उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से प्राथमिक विद्यालयों में सोलर आर0ओ0 वाॅटर संयंत्रों की स्थापना की योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत अब तक प्रदेश में 3,400 प्राथमिक विद्यालयों में सोलर आर0ओ0 वाॅटर संयंत्रों की स्थापना करायी गयी है। प्रदेश में सिंचाई हेतु कृषकों को अनुदान पर सोलर पम्प उपलब्ध कराये जाने की योजना क्रियान्वित की गयी है। इस योजना के अन्तर्गत विभिन्न क्षमता के कुल 29,648 सोलर पम्पों की स्थापना करायी गयी है।
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