
लखनऊ | विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर 11 फरवरी को लखनऊ में विरोध सभा होगी। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रीसिटी इंप्लाइज एंड इंजिनीनियर्स के आह्वान पर 11 फरवरी को सभी प्रान्तों की राजधानियों में बिजली कर्मचारी विरोध सभाएं करेंगे।इसी क्रम में लखनऊ में विरोध सभा होगी। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा विद्युत आपूर्ति के निजीकरण के विरोध में विगत 27 जनवरी को बिहार के बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों व अभियन्ताओं के शान्तिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस द्वारा बर्बर लाठी चार्ज और उस बर्बर कृत्य के लिए प्रबन्धन पर कोई कार्यवाही के बजाय संयुक्त मोर्चा के संयोजक इंजीनियर सुरेन्द्र कुमार को निलम्बित किये जाने से देश भर में आक्रोश व्यक्त है। इस घटना से पूरे देश के बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों व अभियन्ताओं में भारी रोष व्याप्त है।
इसके अतिरिक्त भारत सरकार द्वारा 01 फरवरी को प्रस्तुत किये गये केन्द्रीय बजट में तीन वर्ष में सभी मीटरों को बदलकर प्रीपेड मीटर लगाने एवं बिजली आपूर्ति में कई आपूर्तिकर्ताओं की व्यवस्था लागू कर बिजली आपूर्ति के निजीकरण की घोषणा की गयी है। इससे भी बिजली कर्मियों में भारी रोष व्याप्त है।
उक्त घटनाओं के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र 11 फरवरी को प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर विरोध प्रदर्शन कर विरोध दिवस मनाया जायेगा।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उक्त घटनाक्रमों का संज्ञान लेते हुए केन्द्र सरकार को पत्र भेजकर बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों व अभियन्ताओं की भावना से अवगत कराये तथा बिजली सेक्टर में निजीकरण की किसी भी प्रक्रिया को निरस्त किया जाये। साथ ही बिहार सरकार शान्तिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर किये गये लाठीचार्ज के दोषी अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही करे और निलम्बित किय गये संयुक्त मोर्चा के संयोजक इं सुरेन्द्र कुमार को तत्काल बहाल किया जाये।
आज फील्ड हॉस्टल, लखनऊ में हुई बैठक में राजीव सिंह, जय प्रकाश, गिरीश पाण्डे, सदरूद्दीन राणा, सोहेल आबिद, विनय शुक्ला, शशिकान्त श्रीवास्तव, पवन श्रीवास्तव, डी के मिश्रा, सुनील प्रकाश पाल, राम प्रकाश, जी वी पटेल, वारिन्दर शर्मा, महेन्द्र राय, वी सी उपाध्याय, परशुराम, पी एन तिवारी, पी एन राय, ए के श्रीवास्तव, कुलेन्द्र प्रताप सिंह, मो. इलियास, के एस रावत, अमिताभ सिन्हा, भगवान मिश्र, करतार प्रसाद, आर एस वर्मा, पी एस बाजपेयी, वी के सिंह ‘कलहंस’ मुख्यतया उपस्थित थे।
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