
जनसत्ता नाम से राजनीतिक दल के ऐलान के बाद शुक्रवार को रैली में रघुराज प्रताप सिंह ने देश के मजदूर, किसान और जवानों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने आरोप भी लगाया कि देश के सभी राजनीतिक दल आज नफरत फैला रहे हैं लेकिन जनसत्ता सभी को एकजुट रखने के लिए उद्देश्य के साथ आगे बढ़ेगी।
रघुराज प्रताप सिंह ने रैली के दौरान कहा कि हमारी पार्टी के नाम के लिए चुनाव आयोग में प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि जनसत्ता दल, जनसत्ता पार्टी, जनसत्ता लोकतांत्रिक दल में से कोई नाम मिलेगा।
रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने कहा, ‘बहुत से ऐसे विषय हैं, जिस पर सारे राजनीतिक दल मौन हैं। ये मुद्दे समाज को छूने वाले मुद्दे हैं। मजदूर, किसान और जवान इनके लिए पार्टी दृढ़ संकल्पित है। समय से बिजली, समय से पानी, समय से खाद यह किसान को उपलब्ध होना चाहिए। गन्ना किसान हमारे परेशान हैं, महीनों बीत चुके हैं लेकिन अब तक उनका भुगतान नहीं किया गया है। जनसत्ता पार्टी सत्ता में आने के साथ ही यह सुनिश्चित करेगी कि गन्ना किसान मिल में पहुंचे तो एक हफ्ते के भीतर उनका भुगतान करा दिया जाए।’
राजा भैया ने रमाबाई मैदान में आयोजित जनसभा में कहा, ‘देश सुरक्षित है तो उसका श्रेय जाता है हमारे जवानों को। जनसत्ता सत्ता में आई तो सीमा पर शहीद होने वाले जवान के परिवारवालों को, अर्धसैनिक बल के जवान के परिवारवालों को 1 करोड़ रुपये दिया जाएगा। आज सारे दल समाज में वैमनष्यता फैला रहे हैं। हमारी जनसत्ता सभी को एकजुट रखने के लिए प्रतिबद्ध है।’
रघुराज प्रताप सिंह ने कहा, ‘मुआवजा दिया जा रहा है तो जाति के आधार पर दिया जा रहा है। किसी के परिवार में यदि हत्या हो जाती है तो पूरा परिवार उजड़ जाता है। ऐसा नहीं है कि दलित को ज्यादा कष्ट होता है और गैर दलित को कम कष्ट होता है। हम समानता की बात कर रहे हैं। कई राजनीतिक दल आपको मुद्दे से भटकाएंगे। मैं खुलकर कहता हूं कि कहा जाएगा कि रघुराज की पार्टी दलित विरोधी है। ऐसा बिलकुल नहीं है, दलित हमारे समाज का एक अभिन्न अंग हैं। बिना उसके समाज की कल्पना नहीं कर सकते हैं। हर जाति के लोगों को समान अधिकार दिए जाने चाहिए।’

गौरतलब है कि 30 नवंबर 1993 को राजा भैया कुंडा विधानसभा सीट से पहली बार एमएलए बने थे। कई राजनीतिक दलों में खासी पैठ रखने वाले राजा भैया अपने राजनीतिक जीवन के 25 साल तक निर्दलीय विधायक के रूप में ही विधानसभा पहुंचते रहे हैं।
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