रामगोपाल ने निष्कासन को बताया असंवैधानिक, बोले- मुलायम अनुशासनहीन


 

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लखनऊ: समाजवादी पार्टी से एक बार फिर 6 साल के लिए निकाले गए प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह की इस कार्रवाई को असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि गलत तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है। इस पार्टी में काफी पहले से ही शीर्ष स्तर से असंवैधानिक काम हो रहे हैं। अगर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष ही इस तरह के काम करेगा तो फिर जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की मांग पर आपातकालीन मीटिंग बुलाई जा सकती है। मुलायम सिंह यादव ने नोटिस भेजने के बाद जवाब दिए जाने तक का इंतजार नहीं किया। यह पूरी तरह से एकतरफा कार्रवाई है।

-बिना जवाब सुने किसी को पार्टी से निकालना गलत बात है। मुझे और अखिलेश को बिना गलती के बाहर निकाला गया।
-जीतने वालों की टिकट काटी गई। इटावा, मैनपुरी और औरैया में भी अन्नाय हुआ है।
-चुनाव में मालूम पड़ेगा कि कौन दूसरे लोगों में माना जाता है। मैं अब भी खुद को पार्टी का महासचिव मानता हूं।
-एक जनवरी के बाद आगे की रणनीति का खुलासा करूंगा। प्रत्याशियों के नाम तय करने से पहले किसी से कोई बात नहीं की गई।

सपा में पिछले कई महीनों से चल रही उठापटक के बीच 17 नवंबर को रामगोपाल यादव की पार्टी में फिर से वापसी हुई थी। सीएम अखिलेश का खुलकर समर्थन और नेताजी के खिलाफ लेटर लिखने की वजह से उन्हें पहले भी 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया था। इसके बाद रामगोपाल यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस में रो भी पड़े थे। पार्टी को याद करते हुए कहा था कि मुलायस सिंह को उन्होंने कभी धोखा नहीं दिया। समाजवादी पार्टी में रहूं या ना रहूं, लेकिन हमेशा दिल से उनके ही साथ रहूंगा। इतना ही नहीं, नोटबंदी पर जिस तरह उन्होंने राज्यसभा में पार्टी का पक्ष रखा, उसे देखकर सब हैरान रह गए थे। इसी के बाद गलती मान लेने पर मुलायम सिंह ने उन्हें फिर पार्टी में वापस ले लिया था।


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