भूमि अधिग्रहण और मुआवजा देने का मामला ही छिपा लिया जिससे की ROB की लागत कम हो और कम समय में टेंडर खुल सकें

लखनऊ | सेतु निगम के कुछ अफसर अपनी मनचाही कम्पनी को टेंडर देने के लिए शासनादेश का खुले आम उल्लंघन कर रहे हैं वहीं भूमि अधिग्रहण और मुआवजा देने का मामला ही छिपा लिया जिससे की ROB की लागत कम हो और कम समय में टेंडर खुल सकें । जिससे कि इसी महीने रिटायर हो रहे अफसर मलाई खा सकें।
जनपद लखनऊ में गोसाईगंज-बनी-मोहान मार्ग (राज्य मार्ग सं-136) पर अनूपगंज में पड़ने वाले रेलवे क्रासिंग सं0 188-सी पर 04 रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण हेतु दिनांक 9 अक्टूबर 2023 को एक शासनादेश जारी हुआ था जिसमें नियम एवं शर्तों में स्पष्ट रूप से अंकित था कि उक्त सेतु के निर्माण कार्य हेतु कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम होगी फिर भी सेतु निगम के अधिकारियों द्वारा इसे ईपीसी मोड पर देने की तैयारी कर ली गई। खबर यह भी है कि ईपीसी मोड पर सेतुओं को बनाने हेतु सरकार द्वारा कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं दिया गया है।
जानकार सूत्रों के मुताबिक जनपद लखनऊ में अनूपगंज के निर्माण में 32 मीटर चौड़ा पुल का निर्माण किया जाना है जिसमें किसानों की भूमि भी अधिकृत की जानी है लेकिन भूमि अधिग्रहण के संबंध में एस्टीमेट में कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है, यदि एस्टीमेट में भूमि अधिग्रहण का जिक्र किया जाता तो पुल की लागत बढ़ जाती और पुल की लागत बढ़ जाती तो टेंडर खुलने की अवधि भी 45 दिन करनी पड़ती लिहाजा भूमि अधिग्रहण हेतु किसानों को दी जाने वाली मुआवजा की धनराशि कम होने के कारण पुल की लागत घटाई गई है जिससे कि टेंडर को 21 दिन में खोला जा सके और मनचाही फर्मों को काम दिया जा सके।
यह भी कहा जा रहा है कि चुकी सेतु निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी 31 दिसंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं इसे देखते हुए ही यह सारा खेल किया गया है। अब देखना यह है कि पुल निर्माण के समय क्या किसानों की जमीन अधिग्रहीत करने के पश्चात मुआवजे की धनराशि को बांटने के लिए क्या दोबारा एस्टीमेट तैयार करना पड़ेगा और यदि ऐसा है तो क्या सेतु निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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