
महाविद्यालय के वरिष्ठतम शिक्षक को नियमानुसार अभी तक नहीं दिया गया कार्यवाहक प्राचार्य का कार्यभार
lucknow| मामला अनुदानित अशासकीय सहायता प्राप्त सन्त तुलसी दास पी.जी.कालेज कादीपुर सुल्तानपुर में विगत 05 अक्टूबर 2018 को अधिवर्षता आयु 62 वर्ष पूर्ण कर चुके प्राचार्य डां.अब्दुल रसीद के सेवानिवृत्त होने के बाद से महाविद्यालय के वरिष्ठतम शिक्षक डां.इन्दुशेखर उपाध्याय को कार्यभार हस्तान्तरित नहीं किया गया जिसके कारण प्रबन्धक की मेहरबानी से बिना प्राचार्य के ही महाविद्यालय चल रहा है। और अधिवर्षता आयु पूर्ण कर चुके डां.अब्दुल रसीद के निर्दशन में ही महाविद्यालय का आडिट कार्य भी सम्पन्न हो रहा है। और सभी पत्रावलियों पर बाकायदा हस्ताक्षर आदि भी किया जा रहा है। और तो और 16 अक्टूबर से प्रारम्भ हो रही बैकपेपर परीक्षा-2018 में अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद से सम्बद्ध लगभग 32 कालेजो का परीक्षा केन्द्र पर केन्द्राध्यक्ष के रुप में सेवानिवृत्त/अधिवर्षता आयु पूर्ण कर चुके डां.अब्दुल रसीद को बनाया गया है।
जबकि उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग से वर्ष 2009 में नियुक्त प्राचार्य डां.अरविन्द पाण्डेय की मा.सुप्रीमकोर्ट द्वारा जुलाई-2016 में की गयी बर्खास्तगी के बाद महाविद्यालय के वरिष्ठतम शिक्षक व अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डां.अब्दुल रशीद को कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया था। जो एसोशियेट प्रोफ़ेसर पदनाम के सापेक्ष निर्धारित AGP 9000 की जगह कार्यवाहक प्राचार्य बनने के बाद से डां.करुणानिधान उपाध्याय Vs उत्तर प्रदेश सरकार की योजित याचिका के आधार पर हाईकोर्ट के निर्णय एवं उक्त के अनुपालन में निदेशक उच्च शिक्षा इलाहाबाद के आदेश से स्थायी प्राचार्य पद का वेतनमान AGP-10,000 अर्जित किया जा रहा है ।
कार्यवाहक प्राचार्य डां.अब्दुल रशीद की महाविद्यालय में शिक्षक के रुप नियुक्ति तिथि 12.10.1979 एवं जन्म तिथि 05.10.1956 के आधार पर दिनांक 05 अक्टूबर 2018 को अधिवर्षता आयु 62 वर्ष पूर्ण हो चुकी है,बावजूद इसके प्रबन्धतंत्र द्वारा अभी भी अधिवर्षता आयु पूर्ण कर चुके डां.अब्दुल रशीद को ही कार्यवाहक प्राचार्य के पद पर बैठाया गया है। जब कि निदेशक उच्च शिक्षा इलाहाबाद व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी लखनऊ, बरेली एवं आगरा के अनुसार विधिक नियमानुसार अधिवर्षता आयु पूर्ण करने के पश्चात् डां.अब्दुल रशीद को एक शिक्षक के रुप में सत्रलाभ प्रदान करते हुए दिनांक 30.06.2019 तक सेवा विस्तार दिया जा सकता है लेकिन कार्यवाहक प्राचार्य का पदभार अधिवर्षता आयु पूर्ण होने की तिथि(05.10.2018) से ही महाविद्यालय के वरिष्ठतम शिक्षक को ही सौंपना होगा।
नियमानुसार प्राचार्य पद धारित सत्रलाभ मात्र आयोग से चयनित या फाउन्डर प्राचार्य पर ही लागू होता है,जब कि कार्यवाहक प्राचार्य पर सत्रलाभ की सुविधा देय नहीं है। लेकिन अभी तक महाविद्यालय प्रबन्धतंत्र द्वारा सारे नियमो व सिद्धांतो को दरकिनार कर किसी बड़े खेल को अंजाम देने के उद्देश्य से अभी तक महाविद्यालय के वरिष्ठतम शिक्षक डां.इन्दुशेखर उपाध्याय को कार्यवाहक प्राचार्य का पदभार नहीं सौंपा जा सका है,जो कि विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 एवं 1977 तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग रेग्यूलेशन-2018 का खुला उलंघन है, जो महाविद्यालय के शिक्षको कर्मचारियो के साथ साथ समाज में भी यह चर्चा का विषय बना हुआ हैकि आखिर महाविद्यालय प्रबन्धतंत्र की कौन सी मजबूरी हैकि इस प्रकार के विधि विरुद्ध निर्णय का आधार और सारथी बन रहे हैं।
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