मुंबई: अमिताभ बच्चन और फिल्ममेकर सुभाष घई की मौजूदगी में शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी बायोग्राफी ‘एनीथिंग बट खामोश’ को लॉन्च की। इस मौके पर सोनाक्षी सिन्हा, पूनम सिन्हा और राइटर भारती प्रधान भी मौजूद रहीं। मीडिया से बातचीत के दौरान शत्रुघ्न और अमिताभ ने अपनी ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन केमिस्ट्री पर बात की। बिग बी के साथ खटास पर बोले शत्रुघ्न…
शत्रुघ्न की बायोग्राफी में उनके और बिग बी के बीच मनमुटाव और खटास के बारे में कई बातें लिखी गई हैं। जब इस बारे में शत्रुघ्न से पूछा गया तो उन्होंने बताया, “ये बातें सब कल की हैं। अगर नहीं लिखता को ऑनेस्ट बायोग्राफी नहीं होती। इसका मतलब ये नहीं कि आज मेरे दिल में कुछ खटास है। वो जवानी का जोश और स्टारडम का तकाजा था। यदि हम दोस्त हैं, तो हमें लड़ने का भी हक है। अगर आज आप मुझसे पूछे तो मैं कहूंगा कि मेरे दिल में अमित (अमिताभ बच्चन) के लिए बेहद आदर हैं और मैं उन्हें पर्सनालिटी ऑफ द मिलेनियम मानता हूं।”
शत्रुघ्न की लेटलतीफी बिग बी ने की उजागर
शत्रुघ्न अपनी लेटलतीफी के लिए काफी मशहूर हैं। इस बारे में बिग बी बोले, “कुछ आदतें पैदाइशी होती हैं, उन्हें बदलना नहीं चाहिए। उन दिनों हम लोग दो फिल्मों ‘शान’ (1980) और नसीब (1981) में साथ काम कर रहे थे। सुबह 7 से दोपहर 2 बजे तक ‘शान’ की शूटिंग फिल्मसिटी में होती थी। दोपहर 2 से रात 10 बजे तक ‘नसीब’ की शूटिंग चांदी वली स्टूडियो में। हम दोनों फिल्म के क्लाइमेक्स पर काम कर रहे थे। 7 से 2 बजे तक काम करने के बाद हमारी छुट्टी होती थी। मैं गाड़ी में बैठ चांदी वली स्टूडियो चला जाता था। ये (शत्रुघ्न) भी अपनी गाड़ी में बैठ चांदी वली की ओर निकलते थे। मैं ढाई बजे पहुंचता था और ये 6-7 बजे तक आते थे। जाना एक ही जगह है, लेकिन ये कहां चले जाते थे? ये मैं आज इनसे जानना चाहूंगा।” इसपर शत्रुघ्न बोले, “अब तो बड़ी देर कर दी मेहर-बा आते आते। अब बताकर क्या फायदा।”
अटेंशन सीकर हैं शत्रुघ्न
शत्रुघ्न के बारे में कहा जाता है कि वे लोगों को ओवर शेडो कर अटेंशन बटोरते हैं। इस बारे में बिग ने फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ (1972) से जुड़ा दिलचस्प किस्सा सुनाते हुए कहा, “वे जहां भी रहें सबका अटेंशन बटोरते हैं। हमने ‘बॉम्बे टू गोवा’ में काम किया। फिल्म के एक सीन में, मैं अरुणा ईरानी जी के साथ स्वीमिंग पूल के किनारे शूटिंग कर रहा था। शत्रुघ्न के साथ डायलॉग खत्म हो गए थे और वे थोड़ी दूरी पर चले गए थे। तब मैं और अरुणा जी कैमरे के सामने अपनी सीन्स दे रहे थे। डायलॉग के बीच एक सिगरेट के धुंए का छल्ला हमारे चेहरे के बीच आ गया। भाई साहब (शत्रुघ्न) पीछे बैठे थे और स्मोक रिंग छोड़ रहे थे। ताकी लोगों का ध्यान अरुणा जी और मुझमें न होकर उनपर जाए। लेकिन यह एक बहुत ही खूबसूरत क्वालिटी है।”
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