
समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को समझना चाहिए कि इसके पूर्व भी मायावती पिछड़ों, दलितों और मुसलमानों का वोट लेकर भाजपा की गोद में बैठ चुकी हैं। ऐसे में कहीं ऐसा न हो कि इतिहास फिर से स्वयं को दोहराए और मायावती चुनाव के बाद भाजपा से जा मिलें। ये भी सबको पता है कि हाल ही में राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन न करके बीजेपी को लाभ किसने पहुंचाया?
प्रसपा (लोहिया) के मुख्य प्रवक्ता सीपी राय ने कहा कि शनिवार को मायावती के साथ साझा प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव को लीडर के बजाए रीडर के रूप में देखकर दु:ख हुआ। वह मायावती के सामने इतने नर्वस थे कि लिखा हुआ पढ़कर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बसपा कांशीराम की देन है तो सपा मुलायम सिंह यादव की, लेकिन साझा प्रेसवार्ता के मंच पर लगे बैनर से दोनों के नाम गायब थे। उन्होंने दावा कि देश स्तर पर कांग्रेस और यूपी में प्रसपा (लोहिया) भाजपा से लड़ रही है।
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