डेबिट कार्ड, भीम यूपीआई वगैरह से दो हजार तक के लेन-देन पर सब्सिडी


 

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नई दिल्ली: डेबिट कार्ड के जरिए दो हजार रुपये की खऱीद में आसानी होगी क्योंकि सरकार ने डेबिट कार्ड के साथ ही भीम यूपीआई या फिर आधार आधारित भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल कर 2 हजार रुपये तक के लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआऱ के लिए सब्सिडी देने का फैसला किया है. एमडीआर को ट्रांजैक्शन फीस के नाम से भी जाना जाता है.

 

एमडीआर को दूसरे शब्दों में ट्रांजैक्शन फीस भी कहते हैं. ये रकम कार्ड जारी करने वाली वित्तीय संस्था लेती है. बड़े दुकानों, मॉल, होटल वगैरह इस फीस का बोझ खुद ही उठाते हैं जबकि छोटे और मझौले दुकानदार ये पैसा ग्राहकों से लेते हैं. एमडीआर की व्यवस्था में बैंक या वित्तीय संस्था प्राप्त भुगतान में से कुछ रकम काटकर बाकी पैसा कारोबारी को अदा करते हैं, इसीलिए इस फीस को मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी कारोबारियों को भुगतान की जाने वाली रकम में कटौती की दर के नाम से जाना जाता है.

 

कैबिनेट की फैसले के मुताबिक, एमडीआर पर सब्सिडी की व्यवस्था पहली जनवरी से लागू होगी और दो साल तक लागू रहेगी. नई व्यवस्था में सब्सिडी का भुगतान बैंक या भुगतान व्यवस्था मुहैया कराने वाली संस्था को मुहैया करायी जाएगी. सरकार को उम्मीद है कि इससे ग्राहकों और दुकानदारों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा. नतीजतन डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा. एक अनुमान है कि दो हजार रुपये से कम लेन-देन के लिए एमडीआर पर सब्सिडी के मद में 1050 करोड़ रुपये का भुगतान 2018-19 और 1,462 करोड़ रुपये का भुगतान 2019-20 में किया जाएगा.

 

पहली जनवरी से ही एमडीआर की नई व्यवस्था लागू की जा रही है. इसमें लेन-देन की रकम के बजाए कुल कारोबार को एमडीआर का आधार बनाया गया है. साथ ही प्वाइंट ऑफ सेल्स यानी पॉस मशीन और क्विक रिस्पांस यानी क्यू आर कोड के लिए दरें अलग-अलग कर दी यी है. हालांकि कारोबारी नई व्यवस्था से खुश नहीं है और उनका कहना है कि इससे उनपर बोझ बढ़ेगा और अंत में ये ग्राहकों को ही उठाना पड़ेगा. यदि ऐसा हुआ तो डिजिटल लेन-देन पर असर पड़ेगा. इसी सब को देखते हुए सरकार ने छोटे लेन-देन के लिए सब्सिडी का फैसला किया है.

 

क्या है एमडीआर की नई व्यवस्था?

 

नई व्यवस्था के तहत कारोबारियों को दो समूह में बांटा गया है और हर समूह के लिेए एमडीआर की अलग-अलग दर होगी. इसके मुताबिक,

 

– छोटे कारोबारी, यानी बीते कारोबारी साल में जिनका कुल कारोबार 20 लाख रुपये तक था, उनके लिए पॉस (POS)  पर एमडीआर की दर 0.4 फीसदी तक हो सकती है. यानी 1000 रुपये की खऱीद पर 4 रुपये का एमडीआर. लेकिन एक लेन-देन पर एमडीआर ज्यादा से ज्यादा 200 रुपये ही हो सकता है.

 

– अगर छोटे व्यापारी ने क्यू आर कोड की व्यवस्था कर रखी है तो वहां एमडीआर की दर की सीमा 0.3 फीसदी होगी.. यानी 1000 रुपये के लेन-देन पर तीन रुपये का एमडीआर. यहां भी किसी एक लेन-देन पर एमडीआर ज्यादा से ज्यादा 200 रुपये हो सकता है. मतलब ये है कि खरीद चाहे कितनी ही बड़ी क्यों ना हो, उसपर 200 रुपये से ज्यादा एमडीआर नहीं वसूला जा सकता.

 

– 20 लाख रुपये से ज्यादा का सालाना कारोबार करने वाले व्यापारी के लिए एमडीआर की दर 0.9 फीसदी तक होगी. मतलब एक हजार रुपये के लेन-देन पर 9 रुपये का एमडीआर. क्यू आर कोड की सूरत में एमडीआर की दर 0.8 फीसदी होगी. यानी 1000 रुपये के लेन-देन पर आठ रुपये. दोनों ही स्थिति में एक लेन-देन पर एमडीआर ज्यादा से ज्यादा 1000 रुपये हो सकता है. मतलब ये है कि खरीद चाहे कितनी ही बड़ी क्यों ना हो, उसपर 1000 रुपये से ज्यादा एमडीआर नहीं वसूला जा सकता.


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