औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल नन्दी ने आज कानपुर यूपीसीडा में पहली समीक्षा बैठक की

लखनऊ । औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने आज कानपुर में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की प्रथम समीक्षा बैठक की।
औद्योगिक विकास मंत्री ने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को पूरी निष्ठा के साथ काम करने और प्रदेश में औद्योगिक विकास के रथ को तीव्र गति के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि जब उद्योग बढ़ेंगे तो रोजगार बढ़ेगा तभी यूपी देश में आगे बढ़ेगा । श्री नन्दी ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वह लगन और मेहनत से काम कर विभाग का नाम रोशन करेंगे।

यूपी सीडा के सीईओ मयूर महेश्वरी ने मंत्री जी का स्वागत किया और विभाग को उनके दिशानिर्देश के अनुसार ही चलाने का आश्वासन दिया ।

इस मौके पर यूपी सीडा के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे ।
बैठक के दौरान प्राधिकरण के कार्यकलापों के सम्पूर्ण जानकारी देने हेतु मंत्री जी के समक्ष प्रस्तुतिकरण किया गया।
पिछले 05 वर्षों में प्राधिकरण द्वारा आकर्षित निवेशः प्रस्तुतिकरण में पिछले 05 वर्षों में प्राधिकरण की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्राधिकरण द्वारा 10,000 करोड़ से अधिक का पूंजी निवेश आकर्षित किये जाने तथा इनसे लगभग 1 लाख लोगों के लिए रोजगार सृजित होने पर विस्तृत जानकारी दी गयी। इस अवधि में प्राधिकरण द्वारा लगभग 1100 एकड़ भूमि आबंटित की गई है जो कि एक रिकॉर्ड उपलब्धि है। कोविड महामारी के दौरान भी, 07 देशों से रू0 300 करोड़ से अधिक के पूंजी निवेशों के प्रस्ताव, 13 राज्यों से रू0 3000 हजार करोड़ का निवेश आकर्षित तथा 20,000 से अधिक का रोजगार सृजन किया है। पिछले 05 वर्षो में कई मेगा परियोजनाएं जैसे एबी मौरी(1100 करोड़ निवेश तथा 5 हजार रोजगार), एसीसी लिमिटेड (50 करोड़ निवेश तथा 200 रोजगार), एसएलएमजी लि0 (कोका कोला) (300 करोड़ निवेशतथा 450 रोजगार), बर्जर पेंटस इण्डिया लि0(200 करोड़ निवेश तथा 1100 रोजगार), वरून बेवरेजेज लि0(260 करोड़ निवेश तथ 560 रोजगार), शैल्विस स्पेश्यिलिटीज लि0 (250 करोड़ निवेश तथा 1500 रोजगार) तथा ऐसी कई अन्य इकाईयों द्वारा अपनी इकाईयां स्थापित की गई हैं या की जा रही हैं।
ये निवेश, राज्य के सभी चार क्षेत्रों – पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल और बुंदेलखंड में सुवितरित है। पश्चिम में सहारनपुर से पूर्व में देवरिया तक और उत्तर में पीलीभीत से दक्षिण में चित्रकूट तक कई प्रतिष्ठित उद्यमियों द्वारा निवेश करते हुए अपनी प्रमुख परियोजनाएं स्थापित की हैं अथवा की जा रही हैं।
प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही प्रमुख परियोजनाऐं: प्रस्तुतिकरण में प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही प्रमुख परियोजनाओं पर भी मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा प्रकाश डाला गया जिसमें मुख्य रूप से प्रयागराज में 1139 एकड़ तथा आगरा में 1000 एकड़ को इंट्रीग्रेटेड मैनुफेक्चरिंग क्लस्टर के रूप में, एनआईसीडीसी से सैद्धान्तिक अनुमोदन प्राप्त करना, बहेड़ी तथा बाराणसी में एग्रो पार्क में विकास कार्य, ट्रान्स गंगा सिटी, कोसी कोटवन, बन्थर तथा पीलीभीत के विकास कार्यों के बारे में बताया गया। इसके अतिरिक्त प्राधिकरण द्वारा सम्पूर्ण प्रदेश में आक्सीजन की आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए आक्सीजन ग्रिड की स्थापना करने के उद्देश्य से आईनॉक्स, एयर लिक्विड, कृभको, प्रभा इण्डस्ट्रीज आदि आक्सीजन निर्माण कम्पनियों को प्राथमिकता पर भूखण्ड उपलब्ध कराने के विषय में अवगत कराया गया। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपलक अधिकारी द्वारा यह भी बताया गया कि प्रदेश के 18 जिलों में ऐसे 30 आक्सीजन प्लान्टों को भूमि आवंटित की गयी है, जिनमें रू0 600 करोड़ से अधिक का निवेश प्राप्त हो रहा है।
प्राधिकरण के औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश प्रवाह में तीव्र वृद्धिः मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा माननीय औद्योगिक विकास मंत्री जी को यह भी संज्ञानित किया गया कि वर्ष 2018 से अब तक निवेश प्रवाह में दुगनी वृद्धि तथा रोजगार सृजन में 2.1 गुना वृद्धि हुई है जिसमें कोविड-19 का समय भी शामिल है।
प्राधिकरण की नितियों के सरलीकरण एवं उनमें पारदर्शिता हेतु किये गये प्रयासः मा0 मंत्री जी द्वारा प्राधिकरण की नितियों के सरलीकरण एवं उनमें पारदर्शिता लाने हेतु किये गये प्रयासों की भी समीक्षा की गयी। मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा बताया गया कि प्राधिकरण की नितियों के सरलीकरण एवं उनमें पारदर्शिता लाई गयी है। भूखण्डों का आवंटन, पारदर्शी तरीके से, ऑनलाईन निवेश मित्र पोर्टल अथवा ऑनलाईन ई-निलामी के माध्यम से किये जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, प्राधिकरण की 30 सर्विसेज का ऑनलाईन तथा समयबद्ध निस्तारण किया जा रहा है। प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जा रही इन ई-सेवाओं के कारण आवेदक की भौतिक उपस्थिति के बिना ही आवेदनों को निस्तारित किया जा रहा है तथा प्राधिकरण में भौतिक रूप से आने वालों की संख्या 2019 में 90 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2021-2022 में 10 प्रतिशत हो गयी है।
प्राधिकरण द्वारा किए गए अन्य नीतिगत सुधारों में से प्रमुख हैं समय विस्तारणशुल्क हेतु न्यूनतम अवधि को 3 माह से घटाकर 1 माह किया जाना, आबंटियों द्वारा देय अनुरक्षण शुल्क में कटौती, औद्योगिक भूखण्डों के संविलयन में दोहरे स्टाम्प की देयता की समाप्ति तथा प्रक्रिया में लगने वाले समय को 01 माह से घटाकर 15 दिन करना, वित्तीय संस्थाओं द्वारा नीलामी के प्रकरणों में उद्यमियों द्वारा क्रय किये गये भूखण्ड पर लीज अधिकार हस्तांतरित करने पर पुनः लीजडीड कराये जाने के प्रावधान की समाप्ति, औद्योगिक क्षेत्रों की साफ-सफाई एवं अतिक्रमण हटाये जाने हेतु प्रभावी कार्यवाही करना तथा क्षेत्रीय कार्यालय स्तर पर अधिकारों का प्रतिनिधायन, वेयरहाउसिंग एवं गोदामों के लिए क्रय योग्य फ्लोर एरिया अनुपात (एफ0ए0आर0) में वृद्धि।
प्राधिकरण में पहली बार एक मुश्त समाधान योजनाः मा0 मंत्री जी को यह भी अवगत कराया गया कि प्राधिकरण में कई वर्षों से रखरखाव शुल्क न देने वाले आवंटियों को अपने देयताओं के भुगतान हेतु आकर्षित करने के लिए पहली बार एक मुश्त समाधान योजना लागू की गयी है जिससे योजना के अन्तर्गत 3000 से अधिक आबंटियों से रू0 59.00 करोड़ प्राप्त हुए हैं तथा किस्तों में लगभग रू0 11 करोड़ अभी प्राप्त होने हैं, जो पिछले 04 वर्षों के सापेक्ष 540 प्रतिशत अधिक है।
प्राधिकरण द्वारा 08 लॉजिस्टिक परियोजनाएं आकर्षितः मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा मा0 मंत्री जी के समक्ष, वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक नीति-2018 के अन्तर्गत नोडल एजेन्सी के रूप में प्राधिकरण द्वारा किये गये कार्यों के बारे में भी प्रस्तुतिकरण किया गया जिसके अन्तर्गत 08 लॉजिस्टिक परियोजनाओं हेतु 90 एकड़ भूमि पर लगभग रू0 500 करोड़ का पूॅजी निवेश आकर्षित करने में सफलता मिली है। प्राधिकरण द्वारा वेयरहाउसिंग लॉजिस्टिक्स ऑनलाइन पोर्टल का शुभारम्भ 24 दिसम्बर, 2020 को किया गया तथा सभी आवेदन ऑनलाइन प्राप्त किए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश ने इस वर्ष लॉजिस्टिक्स ईज अक्रौस डिफरेन्ट स्टेट्स (LEADS) रैंकिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2019 में 13वीं रैंक से वर्ष 2021 में 6 वें स्थान पर एक महत्वपूर्ण छलांग लगाई है। लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधा के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाए गए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र तथा यूपीसीडा द्वारा किए गए प्रयासों के कारण लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अन्य सभी राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश के कार्यप्रदर्शन को सबसे उल्लेखनीय सुधार के रूप में स्वीकार किया गया है।
राजस्व तथा भूमि आवंटन में रिकॉर्ड वृद्धिः प्राधिकरण द्वारा किये गये प्रयासों के फलस्वरूप, विगत 03 वर्षों में ऑपरेटिंग राजस्व में 6.15 प्रतिशत, भूमि आवंटन में 272 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
प्राधिकरण के औद्योगिक क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं में सुधारः प्राधिकरण के आबटियों द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों की अवस्थापना सुविधाओं को सुधारने की मांग के दृष्टिगत, औद्योगिक क्षेत्रों में युद्धस्तर पर सड़कों, नालियों, प्रकाश व्यवस्था आदि में सुधार किया गया है जिससे पिछले वर्षों की तुलना में औद्योगिक क्षेत्रों में विकास कार्यो पर 119 प्रतिशत अधिक व्यय किया गया है जिससे आवंटियों को कार्य करने में अधिक सुविधायें प्राप्त हुई हैं।
राष्ट्रीय तथा अन्तराष्ट्रीय निवेशकः प्राधिकरण के इन्हीं प्रयासों के कारण विगत वर्षों में कई राष्ट्रीय तथा अन्तराष्ट्रीय निवेशकों जैसे – एबी मौरी (रू0 1100 करोड़), आईटीसी लि0 (रू0 760 करोड़), पेप्सिको इण्डिया होल्डिंग प्रा0 लि0 (रू0 750.00 करोड़), एसीसी लि0 (रू0 500 करोड) आदि द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों में किये गये निवेश के बारे में भी प्रस्तुतिकरण में जानकारी दी गयी।
एनसीआर क्षेत्रों में पड़ने वाले औद्योगिक क्षेत्रों पर विशष फोकसः मा0 मंत्री जी द्वारा आबंटित तथा कब्जा प्राप्ति के उपरान्त भी अनुपयोगित भूखण्डों की समीक्षा की गयी तथा ऐसे निवेशकों को अपनी इकाई स्थापित करने हेतु समस्त सुविधायें देते हुए प्रोत्साहित करने हेतु प्राधिकरण को निर्देश दिये गये। निवेशकों की एनसीआर क्षेत्र में विशेष रूचि के दृष्टिगत प्राधिकरण के एनसीआर क्षेत्रों में पड़ने वाले औद्योगिक क्षेत्रों की विशेष समीक्षा करते हुए मा0 मंत्री जी द्वारा निर्देशित किया गया कि इन औद्योगिक क्षेत्रों से सम्बन्धित समस्त समस्याओं को शीघ्रातिशीघ्र निस्तारण करते हुए सुनिश्चित किया जाये कि अच्छे निवेशक इस क्षेत्र में अपनी इकाई स्थापित करने में सुविधा अनुभव करें।
डैशबोर्ड ”दृष्टि” का शुभारंभः माननीय औद्योगिक विकास, निर्यात और निवेश संवर्धन मंत्री, श्री नंद गोपाल गुप्ता “नंदी“ द्वारा आज यूपीसीडा की आपूर्ति और इंजीनियरिंग कार्य की निगरानी के लिए डैशबोर्ड ”दृष्टि” (डैशबोर्ड-फॉर-रीयल-टाइम अंर्तदृष्टि, पर्यवेषण और सूचना) का शुभारंभ किया गया। दृष्टि को माईक्रोसॉफ्ट पावर बीआई पर होस्ट किया जाएगा, जिससे वेब/मोबाइल इंटरफेस के माध्यम से यूपीसीडा में कई हितधारकों तक पहुंच होगी। सिस्टम में संभावित देरी पर पूर्व चेतावनी के लिए रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और प्रेडिक्टिव एनालिटक्स का प्रावधान है, जिससे इंजीनियरिंग कार्यों की “समय पर“ और “लागत के भीतर” संचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। यह डैशबोर्ड, डिजिटल रिकॉर्ड डेटाबेस को बनाए रखने में मदद करेगा, जिसमें प्रश्न आधारित रिपोर्ट तैयार करने और ड्रिल-डाउन सुविधा के साथ डेटा विज़ुअलाइज़ेशन का प्रावधान होगा।
लीडा में भखण्डों के भवन मानचीत्र स्वीकृति हेतु ऑनलाईन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम का शुभाराम्भः माननीय मंत्री जी द्वारा लीडा के आवंटियों की सुविधा के लिए ऑनलाईन ”बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम” का शुभारम्भ किया गया। इस सुविधा के उपलब्ध होने से यूपीसीडा की तरह ही लीडा के आवंटी भी भवन मानचित्र स्वीकृति हेतु ऑनलाईन आवेदन प्रस्तुत कर सकेगें तथा उनका मोनिटरिंग तथा निस्तारण समयबद्ध रूप में किया जा सकेगा। लीडा के आवंटियों द्वारा स्वीकृति भी ऑनलाईन ही प्राप्त की जायेगी जिससे उन्हें कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी।
मंत्री द्वारा बैठक में उपस्थिति सभी अधिकारियों को निर्देश दिये गये कि प्राधिकरण अपनी कार्यशैली में और अधिक पारदर्शिता तथा समयबद्धता का पालन करते हुए राज्य के औद्योगिक विकास में बढ़चढ़ कर सहयोग दें। मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
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