
: बिजली कर्मचारियों की राष्ट्रीय समिति ने केंद्रीय विद्युत् मंत्रालय की अपील ठुकराया : इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2018 वापस लेने , बिजली निगमों का एकीकरण करने , पुरानी पेंशन बहाली और संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी कार्य बहिष्कार का एलान
lucknow |बिजली कर्मचारियों व् इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ एलेक्ट्रीसिटी एम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स (एन सी सी ओ ई ई ई ) ने केंद्रीय विद्युत् मंत्रालय द्वारा इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2018 के सम्बन्ध में एन सी सी ओ ई ई ई को लिखे गए पत्र को नाकाफी बताते हुए 08 व् 09 जनवरी के राष्ट्रव्यापी कार्य बहिष्कार आंदोलन को वापस लेने की केंद्रीय विद्युत् मंत्रालय की अपील को ठुकराते हुए कार्य बहिष्कार पर जाने का एलान किया है | एन सी सी ओ ई ई ई के फैसले के अनुसार देश के लगभग 15 लाख बिजली कर्मचारियों व् इंजीनियरों के साथ उप्र के सभी ऊर्जा निगमों के तमाम कर्मचारी व् इंजीनियर भी 08 व् 09 जनवरी को कार्य बहिष्कार करेंगे |
विद्युत् कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति , उप्र के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे , राजीव सिंह , गिरीश पांडेय ,सदरुद्दीन राना ,बिपिन प्रकाश वर्मा , सुहेल आबिद ,शशिकांत श्रीवास्तव ,डी के मिश्रा ,महेंद्र राय ,मोहम्मद इलियास ,वी सी उपाध्याय ,करतार प्रसाद ,कुलेन्द्र सिंह ,पी एन राय ,पी एन तिवारी ,अशोक कुमार ,परशुराम ,भगवान् मिश्रा , पूसे लाल , ए के श्रीवास्तव ,आर एस वर्मा ,पी एस बाजपेई ने आज यहाँ बताया कि केंद्रीय विद्युत् मंत्रालय के पत्र में कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है अतः कल से होने वाले कार्य बहिष्कार को पूरी दृढ़ता से करने का फैसला लिया गया है |
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के विद्युत् मंत्रालय द्वारा भेजे गए पत्र में केवल इतना ही लिखा गया है कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2018 अभी संसद के पटल पर नहीं रखा गया है और इस बिल पर प्राप्त आपत्तियों को परीक्षण कराया जा रहा है | विद्युत् मंत्रालय ने यह भी लिखा है कि सभी आपत्तियों का परीक्षण कर वार्ता की जाएगी | संघर्ष समिति ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल को वापस लेने का कोई स्पष्ट आश्वासन पत्र में नहीं दिया गया है साथ ही बिजली निगमों के एकीकरण ,पुरानी पेंशन बहाली और संविदा कर्मियों के नियमतीकरण के बारे में विद्युत् मंत्रालय ने कुछ भी नहीं कहा है अतः बिजली कर्मचारी पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत 08 व् 09 जनवरी को काम बंद रखेंगे | उन्होंने बताया कि कार्य बहिष्कार आंदोलन से बड़े उत्पादन गृहों , 400 व् 765 के वी पारेषण व् सिस्टम ऑपरेशन की शिफ्ट के कर्मचारियों को अलग रखा गया है जिससे बिजली का ग्रिड पूरी तरह फेल न हो आम लोगों को तकलीफ न हो |
08 व 09 जनवरी को कार्य बहिष्कार के दौरान लखनऊ में शक्ति भवन पर 12 बजे से विरोध सभा आयोजित की गई है जिसमे लखनऊ के सभी कार्यालयों के कर्मचारी व् इंजीनियर सम्मिलित होंगे | कार्य बहिष्कार के दौरान बिजली कर्मचारी कोई कार्य नहीं करेंगे और कोई फाल्ट होने पर उसे दो दिन बाद ही अटेण्डकिया जाएगा |
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल के जनविरोधी प्रतिगामी प्राविधानों का बिजली कर्मचारी और इन्जीनियर्स प्रारम्भ से ही विरोध करते रहे है और इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार को लिखित तौर पर कई बार दिया जा चुका है | उन्होंने कहा कि बिल पारित हो गया तो सब्सिडी और क्रास सब्सिडी तीन साल में समाप्त हो जाएगी जिसका सीधा अर्थ है कि किसानों और आम उपभोक्ताओं की बिजली महंगी हो जाएगी जबकि उद्योगों व् व्यावसायिक संस्थानों की बिजली दरों में कमी की जाएगी | उन्होंने कहा कि संशोधन के अनुसार हर उपभोक्ता को बिजली लागत का पूरा मूल्य देना होगा जिसके अनुसार बिजली की दरें 10 से 12 रु प्रति यूनिट हो जाएंगी |
उन्होंने कहा कि घाटे के नाम पर बिजली बोर्डों के विघटन का प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुआ है | बिजली कर्मचारियों की मुख्य माँग इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल को वापस लेना , इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 की पुनर्समीक्षा और राज्यों में विघटित कर बनाई गयी बिजली कंपनियों का एकीकरण कर बिजली उत्पादन , पारेषण और वितरण का केरल और हिमाचल प्रदेश की तरह एक निगम बनाना है| उल्लेखनीय है कि केरल में बिजली उत्पादन , पारेषण और वितरण का एक निगम केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड और हिमाचल प्रदेश में हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड कार्य कर रहा है |
बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की अन्य मांगे विद्युत् परिषद् के विघटन के बाद भर्ती हुए कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली ,समान कार्य के लिए समान वेतन , ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर नियमित प्रकृति के कार्यों हेतु संविदा कर्मियों को वरीयता देते हुए तेलंगाना की तरह नियमित करना , बिजली का निजीकरण पूरी तरह बंद करना और प्राकृतिक संसाधनों को निजी घरानों को सौंपना बंद करना मुख्य हैं |
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