दिल्ली में राष्ट्रपति शासन या जोड़तोड़ की सरकार?


दिल्ली में राष्ट्रपति शासन या जोड़तोड़ से सरकार बनेगी? राजनेता हों या सत्ता के गलियारे में बैठे नौकरशाह, सभी इसका जवाब ढूंढ रहे हैं।

जनता ने किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं दिया है। सरकार बनाने के लिए 36 सीटें चाहिए, जबकि भाजपा को 32, आप को 28, कांग्रेस को 8 व अन्य को दो सीटें मिली हैं।

व्यवस्था के अनुरूप उपराज्यपाल नजीब जंग बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, लेकिन भाजपा सरकार बनाने से हाथ खींच रही है। दूसरी बड़ी पार्टी आप है जो जादुई आंकड़े से बहुत दूर है।

सूत्रों का कहना है कि भाजपा नेता व आप नेता सरकार बनाने के लिए मना करके एक दूसरे को चेक कर रहे हैं। हर्षवर्धन कह चुके हैं कि वे अपनी तरफ से सरकार बनाने का दावा नहीं करेंगे, उप राज्यपाल चाहें तो उन्हें बुला लें।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी की बैठकों में राष्ट्रपति शासन लगने व विधानसभा भंग होने के नफा-नुकसान पर चर्चा हो रही है। अगर दोनों पार्टी सरकार नहीं बनाती हैं तो उपराज्यपाल नजीब जंग के पास राष्ट्रपति को संविधान की धारा 239ए के तहत राज्य की व्यवस्था रद्द करने की सिफारिश करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है।

लोकसभा व दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव सुदर्शन कुमार शर्मा बताते हैं कि चुनाव आयोग सबसे पहले विधानसभा के गठन की अधिसूचना जारी करेगा। अधिसूचना के बाद उपराज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे।

अगर भाजपा तैयार होती है तो उनके नेता को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाकर बहुमत सिद्ध करने के लिए समय दिया जाएगा। अगर मना करते हैं तो दूसरे नंबर की पार्टी आप को आमंत्रित करने की व्यवस्था है। अगर आप के नेता भी मना करते हैं तो उपराज्यपाल राष्ट्रपति से सिफारिश कर सकते हैं।

ऐसे में राष्ट्रपति शासन के नाम पर सीधे सत्ता गृहमंत्रालय के पास चली जाएगी। ऐसे में उपराज्यपाल सलाहकार की मदद से दिल्ली का शासन चला सकते हैं।

संभावना-1
भाजपा को आमंत्रित करने पर अगर उनके नेता स्वीकार करते हैं तो मुख्यमंत्री की शपथ दिलवाकर बहुमत सिद्ध करने का समय दिया जाए। भाजपा के पास 32 सीटें हैं। एक निर्दलीय विधायक समर्थन देने का इरादा सामने रख चुके हैं।

जेडीयू के विधायक शोएब इकबाल से कोशिश की जा सकती है। ऐसे में जोड़तोड़ करके सदन की उपस्थिति कम की जा सकती है। बहुत के लिए 36 विधायक चाहिएं बहुमत पाने के समय सदन में उपस्थिति कम होने पर कम संख्या से भी काम चल सकता है।

संभावना-2
आम आदमी पार्टी दूसरे नंबर की पार्टी होने के नाते बुलावा मिलने पर सरकार बनाने को तैयार हो। इसके लिए आप के पास सिर्फ कांग्रेस से गठजोड़ करने का ऑप्शन है। आप के 28 विधायक हैं और कांग्रेस के 8 हैं। लेकिन आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल समर्थन न तो लेने और न देने की घोषणा कर चुके हैं।

संभावना-3
उपराज्यपाल दोनों बड़ी पार्टी से अस्वीकृति मिलने पर संविधान की धारा 239ए में मंत्रिमंडल की व्यवस्था, तमाम पद की व्यवस्था रद्द करने की सिफारिश कर सकते हैं। ऐसे में सत्ता राष्ट्रपति के माध्यम से उपराज्यपाल के पास आ जाएगी।

राष्ट्रपति चाहें तो स्वयं संज्ञान लेकर भी राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं। हालांकि विधानसभा भंग करने, निलंबित करने के ऑप्शन उपलब्ध हैं। भंग करने पर विधायकों की सदस्यता खत्म हो जाएगी, जबकि निलंबित करने पर वह कायम रहेगी। हालांकि फिर 6 महीने के अंदर चुनाव कराने होंगे।


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