सरकार के निर्णय के विरोध में यूपीपीपीए ने निकाला मार्च


 

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लखनऊ। राज्य सरकार की ओर से पॉलिथीन के प्रतिबन्ध के निर्णय के विरोध में उत्तर प्रदेश प्लास्टिक प्रोडक्ट्स एसोसिएशन (यूपीपीपीए) के बैनर तले व्यापारियों ने हजरतगंज स्थित हिंदी संस्थान से गांधी प्रतिमा तक मशाल जुलूस के साथ पैदल मार्च निकाला। मार्च में सैकड़ों व्यापारी शामिल हुए और राज्य सरकार के फैसले के विरोध में जमकर नारेबाजी की। गांधी प्रतिमा पर पहुंचकर व्यापारियों ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन सौंपा।

यूपीपीपीए के प्रेसीडेंट रवि जैन का कहना है कि सरकार के द्वारा जल्दबाजी में एकतरफा पॉलीथीन पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने से 50 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं। इसके बावजूद कूड़ा निस्तारण की समस्या वैसी ही बनी हुई है। जबकि 90 प्रतिशत कारण चिप्स, कुरकुरे, शैम्पू आदि की ओर से की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सिर्फ लखनऊ को ही देखें तो 50 टन पॉलीथीन प्रतिदिन ही खपत होती है। इसका विकल्प अगर कागज़ है तो प्रतिदिन 80 टन कागज़ की आवश्यकता होगी और इस हिसाब से सालाना 28 हजार से ऊपर कागज़ की आवश्यकता लखनऊ में होगी। आखिर पूरे प्रदेश में कागज़ की इतनी बड़ी संख्या में खपत कैसे हो पाएगी।
पीपीए एसोसिएशन की मांग है कि केंद्र सरकार के पॉलीथीन से सम्बंधित वर्ष 2011 के गजट को लागू किया जाए। साथ ही यदि पॉलिथीन पूर्णता प्रतिबंधित की जाती है तो बेरोजगार 50 लाख लोगों को रोजगार दिया जाए। इसके आलावा सैकड़ों उद्यमियों द्वारा विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से घर, जेवर गिरवीं रखकर लोन लिया है, जिसके भुगतान का विकल्प दें।

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