राज्यपाल और मुख्यमंत्री के आदेश को भी नहीं मान रहे हैं विश्वविद्यालयों के कुलपति और महाविद्यालय प्रबन्धन


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प्रदेश के शेल्टर गृहो से भी अधिक भ्रष्टाचार व अनियमितता व्याप्त है विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में !!
लखनऊ |  यह उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कुलसचिवो की महाविद्यालय प्रबन्धन से आपसी सांठ गांठ एवं मिली मिलीभगत का ही परिणाम है कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री के आदेशो को नजर अंदाज किया जा रहा है । आखिर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के दर्जनो आदेशो के बावजूद अभी तक प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय द्वारा अपने परिक्षेत्र के महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित शिक्षको का न तो आधार सहित विवरण आंनलाइन किया जा सका है और न ही महाविद्यालय की अवस्थापना सुविधाओ व शिक्षको का भौतिक सत्यापन ही करवाया जा सका है। लेकिन विश्वविद्यालय कुलपतियो/कुलसचिवो द्वारा आये दिन महाविद्यालयों के शिक्षको के आधार सहित विवरण व भौतिक सत्यापन के लिए मात्र सख्त आदेश एवं त्वरित कार्यवाही का तथाकथित प्रेम पत्र विगत एक वर्ष से योगी सरकार में भी निर्गत कर कार्यवाही की दुन्दभी ही बजायी जा रही है।

हकीकत तो यह हैकि महाविद्यालय प्रबन्धन के धनबल,पहुंच व रसूख के आगे सभी घुटना टेक चुके है ? सब के सब कहीं न कहीं शिक्षा के नाम पर संचालित भ्रष्टाचार की इन तथाकथित दुकानो संरक्षण व प्रश्रय एवं प्रोत्साहन ही प्रदान कर रहे है। जिसका परिणाम है कि महाविद्यालय प्रबन्धन मानक विहीन प्राचार्य विहीन व शिक्षक विहीन महाविद्यालयों के भरोसे उच्च शिक्षा में चार चांद लगा रहे है। जिनकी अनियमितता व भ्रष्टाचार पर विश्वविद्यालयो के कुलपतियों एवं कुलसचिवों द्वारा अपनी आंखो पर महाविद्यालय प्रबन्धन से प्राप्त गुलाबी पट्टी बांध ली गयी है।

आख़िरकार तमाम कवायदो के बाद भी आज स्थिति यह हैकि महात्मा गाँधी काशी विद्या पीठ विश्वविद्यालय वाराणसी में 150 कालेजो में प्राचार्य व शिक्षक का पता ही नहीं है तो अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद में आज तिथि में 675 कालेजो में से मात्र 340 में ही प्राचार्य बेबसाइट पर कागजी रुप से परिलक्षित है, मौके पर भी होगे स्पष्ट नहीं, और 127 कालेज आज भी शिक्षक विहीन ही है, गोरखपुर आगरा मेरठ इलाहाबाद झांसी बरेली कानपुर लखनऊ सिद्धार्थनगर बलिया एवं पूर्वाचल विश्वविद्यालय तो आज तक यह ही नही स्पष्ट हो पाया कि कितने प्राचार्य व शिक्षक है या हैं ही नहीं, बावजूद इसके कानपुर विश्वविद्यालय तो पूरे भारत वर्ष में महाविद्यालय सम्बद्धता प्रदान करने में प्रथम स्थान बना चुका है यह दूसरी बात हैकि जब इन्ही महाविद्यालयों के शिक्षको/प्राचार्यों का आधार सहित विवरण आंनलाइन की कवायत शुरु होती है तो आधे से अधिक प्राचार्यों व शिक्षको अनुमोदन प्रदेश के एक से अधिक विश्वविद्यालयों में भी पाया जाता है।


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