तीन तलाक इस्लाम का मौलिक हिस्सा नहीं, महिलाओं के अधिकार का मसला: केंद्र


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नई दिल्ली |  तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के पांचवें दिन अदालत में केंद्र सरकार ने दलील दी कि तीन तलाक इस्लाम का मौलिक हिस्सा नहीं है। केंद्र ने कहा कि तीन तलाक मुस्लिम समुदाय में पुरुष और महिला के बीच का मसला है। इस समाज में पुरुष महिलाओं की तुलना में शक्तिशाली और पढ़ा लिखा है। केंद्र ने कोर्ट में कहा कि तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित करने से मुस्लिम धर्म पर कोई असर नहीं होगा। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि एक समय सती प्रथा, देवदासी जैसी कुप्रथा हिंदू धर्म में थीं। इसपर मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि कोर्ट ने इनमें से किसे खत्म किया? इन सबको कानून बनाकर खत्म किया गया।

केंद्र की तरफ से दलील पेश करते हुए अटॉर्नी जनरल रोहतगी कहा कि तीन तलाक को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदाय के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक समुदाय के अंदर का मामला है और महिलाओं के अधिकार से संबंधित है। सुनवाई के दौरान रोहतगी ने कहा कि अगर सऊदी अरब, ईरान, इराक जैसे देशों में ट्रिपल तलाक खत्म हो सकता है तो भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में 11 मई से ही तीन तलाक पर बहस चल रही है।


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