जीडीए लापरवाही से तीन साल बाद भी पांच हजार लोगों को फ्लैट का इंतजार


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लखनऊ |  जीडीए और बिल्डरों के बीच 15 सौ लोगों के फ्लैट फंसे हुए हैं। करीब तीन साल से अपने आशियाने का इंतजार कर रहे इन लोगों का इंतजार थम नहीं रहा है। वहीं जिन 35 सौ लोगों को अपने फ्लैट का पता मिला है, उनका मामला फ्लैटों की कीमत को लेकर शासन में फंसा पड़ा है। ऐसे में फ्लैट का इंतजार कर रहे लोगों के सामने सिर्फ प्राधिकरण के चक्कर काटने के अलावा ओर कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2013 के अंतिम महीनों में बिल्डर प्रोजेक्ट में सस्ते पांच हजार ईडब्ल्यूएस व एलआईजी फ्लैटों की स्कीम लांच की थी। इसमें करीब 36 हजार लोगों ने आवेदन किया था। अप्रैल 2014 में प्राधिकरण ने ड्रा के जरिए पांच हजार सफल आवेदकों को चयन किया। इसके बाद बिल्डरों ने प्राधिकरण को 3500 फ्लैटों की सूची सौंपी। प्राधिकरण ने इस सूची के आधार पर ड्रा कराकर इन लोगों को आशियाने का पता बता दिया। बाकी बचे 1500 फ्लैटों की सूची बिल्डरों ने अभी तक प्राधिकरण को नहीं सौंपी है। प्राधिकरण कई बार फ्लैटों की सूची के संबंध में बिल्डरों को तलब कर चुका है, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकल रहा है। ऐसे में 1500 लोगों जीडीए के सिर्फ चक्कर ही काट रहे हैं। ऐसे लांच की स्कीम प्राधिकरण नियम के अनुसार अगर कोई बिल्डर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का नक्शा पास कराता है तो उसे कुल स्वीकृत फ्लैटों के बदले 10 फीसद ईडब्ल्यूएस व एलआईजी फ्लैट बनाने का प्रावधान है। यह फ्लैट बिल्डर बनाते है, लेकिन इनकी देखरेख व पजेशन का सारा कार्य प्राधिकरण को करना होता है।

वर्ष 2012 में तत्कालीन जीडीए उपाध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने बिल्डरों के सख्ती करते हुए इस नियम के अनुसार ईडब्ल्यूएस व एलआईजी फ्लैट बनाने के निर्देश दिए थे। साथ ही पांच हजार ईडब्ल्यूएस व एलआईजी फ्लैटों की स्कीम लांच की गई। कीमत को लेकर 35 सौ फ्लैटों पर भी विवाद जीडीए ने इस स्कीम को लांच करते समय ईडब्ल्यूएस की कीमत 2.50 लाख और एलआईजी फ्लैट की कीमत पांच लाख रुपये रखी थी, लेकिन इसके विरोध में कई बिल्डर हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने जीडीए को मामले का निस्तारण करने के निर्देश दिए। जीडीए सचिव रवीन्द्र गोडबोले की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने दोनों पक्षों को सुना और कीमत न बढ़ाए जाने की रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी। बिल्डर सचिव की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुए। इस बार हाईकोर्ट ने शासन को मामले का निस्तारण करने के आदेश दिए। तभी से मामला शासन में फंसा हुआ है। — बिल्डर ने बढ़ी कीमत इस स्कीम में बिल्डरों ने ईडब्ल्यूएस फ्लैट की कीमत ढाई से पांच लाख और एलआईजी की पांच से आठ लाथ रुपये कीमत बढ़ाने की मांग की है।


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