सूचना आयुक्त बनने के लिए सब अपनी गोटियां बैठा रहे है, सीएम की अध्यक्षता में आज होने वाली बैठक टली


लखनऊ। यूपी के दस सूचना आयुक्त के पद रिक्त हो रहे है। इसके लिए आज मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक होनी थी जो किन्ही कारणों से नही हो पा रही है। ऐसे में पिछली सरकार में कई जुगाड़ तंत्र के बल पर सूचना आयुक्त बनने की परम्परा इस बार भी बरकरार रखने के लिए लोग दिल्ली तक में डेरा डाले है तो कुछ अपनी योग्यता के बल पर सूचना आयुक्त बनाना चाह रहे है। ऐसे में पत्रकार वर्ग से भी कई पत्रकार अपनी कटिंग और भाजपा माइण्ड होने का दावा कर राज्य सूचना आयुक्त बनने की फिराक मे है।

राज्य सूचना आयुक्त के पद के लिए यूपी में मारामारी शुरू हो गई है। यहां आठ सूचना आयुक्तों के जनवरी में रिटायर हो जाने के बाद 10 पद रिक्त चल रहे हैं। समझा जा रहा है अभी सारे पद नहीं भरे जाएंगे। करीब छह पदों पर तत्काल नियुक्ति करने की तैयारी है। बाकी रिक्त पदों पर बाद में फैसला किया जाएगा। पत्रकारों के कोटे से भरे जाने वाले इस पद पर अभी सरकार फैसला नहीं करेगी। उल्लेखनीय है कि बीती सरकारों तीन से चार पद पत्रकारों की नियुक्ति करके भरे थे। संघ और भाजपा संगठन की ओर से मुख्यमंत्री पर इस बात को लेकर दबाव बनाया जा रहा था कि सूचना आयुक्तों के रिक्त पद तत्काल भरे जाएं। इसके लिए संघ और संगठन की ओर से अपने अपने नजदीकियों को इस पद पर भरे जाने का दबाव बनाया जा रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किसी के प्रभाव में न आने के कारण ये नियुक्तियां टलती रहीं।

उत्तर प्रदेश में राज्य सूचना आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त के साथ दस सूचना आयुक्तों के पद स्वीकृत हैं। मौजूदा वक्त में सभी पद रिक्त हैं। दो सूचना आयुक्तों के पद पहले से रिक्त हैं। एक पद पूर्व सूचना आयुक्त ज्ञान प्रकाश मौर्य का कार्यकाल खत्म होने के बाद 30 जून 2014 को खाली हुआ था, जबकि दूसरा पद दो जुलाई 2016 को पूर्व आयुक्त खदीजतुल कुबरा का कार्यकाल पूरा होने के बाद रिक्त हुआ था। जनवरी में आठ पद रिक्त हो गए। अब केवल मुख्य सूचना आयुक्त ही यहां पर कार्यरत हैं। बीती जनवरी में जिन सूचना आयुक्तों का कार्यकाल समाप्त हुआ है उसमें अरविंद सिंह बिष्ट, सैयद हैदर अब्बास रिजवी, पारसनाथ गुप्ता, स्वदेश कुमार, हाफिज उस्मान, विजय शंकर शर्मा, राजकेश्वर सिंह और गजेंद्र यादव शाामिल हैं। इन सभी की नियुक्ति सात जनवरी 2014 को हुई थी। मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल पांच साल का होता है। उत्तर प्रदेश में राज्य सूचना आयुक्त पद के लिए राज्य सरकार को दो बार में करीब पांच सौ आवेदन मिले हैं। बीस से ज्यादा आवेदन उन आईएएस और आईपीएस अफसरों के हैं, जो हाल में रिटायर हुए हैं या फिर फरवरी 2019 तक सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

70 से ज्यादा आवेदन पत्रकारों के हैं, जबकि दो सौ से ज्यादा आवेदन वकीलों के हैं। इस पद के आए आवेदनों की स्कैनिंग प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में गठित कमिटी करती है। राज्य सूचना आयोग में नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक चयन समिति गठित होती है। इस चयन समिति में मुख्यमंत्री, नेता विपक्ष और सीएम द्वारा नामित एक मंत्री होता है।


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