
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने पर जोर दिया है। नवगठित सरकार जहां इस दिशा में गम्भीरता से काम करने की बात कह रही है, वहीं उसे पुलिस महकमें में अधिकािरयों की भारी कमी से भी जूझना होगा। दरअसल प्रदेश में आईपीएस अधिकारियों के 23 प्रतिशत और पीपीएस अधिकारियों के 29 प्रतिशत पद खाली हैं। लखनऊ के संजय शर्मा ने बीते 17 जनवरी को एक आरटीआई दायर की थी, जिस पर पुलिस महानिदेशक कार्यालय के अपर पुलिस महानिदेशक कार्मिक पी.सी. मीना और पुलिस महानिरीक्षक प्रशासन प्रकाश डी. ने अब जो सूचना दी है वह बेहद चैंकाने वाली है।
पी.सी. मीना ने बताया कि यूपी में आईपीएस कैडर के कुल 517 पद सृजित हैं, जिनमें से 400 पद भरे हैं और 117 पद खाली हैं। इन 400 पदों में से 366 पर पुरुष और 34 पर महिला अधिकारी तैनात हैं। 400 अधिकारियों में से 380 हिन्दू हैं, 10 मुसलमान हैं, 05 सिख हैं और 05 ईसाई हैं। बीते 10 वर्षों में यूपी कैडर के 06 आईपीएस अधिकारी सेवाकाल में ही मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं। पी.सी. मीना के मुताबिक यूपी में पिछले 10 वर्षों में मात्र 107 आईपीएस अधिकारी ही सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त किये जा सके हैं। जाहिर इस लिहाज से वर्तमान में रिक्त पड़े आईपीएस के 117 पदों का भरना इतना आसान नहीं है।
प्रकाश डी. ने बताया है कि यूपी में पीपीएस कैडर के कुल 1299 पद सृजित हैं, जिनमें से 916 पद भरे हैं और 383 पद खाली हैं। इन 916 पदों में से 289 अपर पुलिस अधीक्षक और 627 पर पुलिस उपाधीक्षक तैनात हैं। 289 अपर पुलिस अधीक्षक में से 275 पुरुष हैं और 14 महिलाएं हैं। 289 अपर पुलिस अधीक्षक में से 276 हिन्दू हैं और 13 मुसलमान हैं। अपर पुलिस अधीक्षक पदों पर सिख, ईसाई और पारसी समुदाय का प्रतिनिधित्व शून्य है। 627 पुलिस उपाधीक्षक में से 585 पुरुष हैं और 42 महिलाएं हैं। 627 पुलिस उपाधीक्षक में से 596 हिन्दू हैं, 25 मुसलमान हैं और 06 सिख हैं। अपर पुलिस अधीक्षक पदों पर ईसाई और पारसी समुदाय का प्रतिनिधित्व शून्य है। बीते 10 वर्षों में 7 अपर पुलिस अधीक्षक और 27 पुलिस उपाधीक्षक सेवाकाल में ही मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं। इन आंकड़ों पर नजर डालें तो आज़ादी के दशकों बाद भी प्रदेश के पुलिस अधिकारियों में महिलाओं और अल्पसंख्यकों का समुचित प्रतिनिधित्व न होना भी एक चिंताजनक स्थिति है। वहीं बीते 10 वर्षों में 6 आईपीएस, 7 अपर पुलिस अधीक्षक और 27 पुलिस उपाधीक्षक के सेवाकाल में मरने के आंकड़े भी विभाग में तनाव और इस वजह से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की ओर इशारा कर रहे हैं।
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