उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों तथा महानगरों में विद्युत तंत्र की निर्बाध व ससमय स्थापना सुनिश्चित होगी


  • औद्योगिक व अन्य निवेश परियोजनाओं को गुणवत्तापरक व अनवरत विद्युत आपूर्ति होगी सुनिश्चित
  • 220 केवी तक के विद्युत तंत्र के चरणबद्ध निर्माण का व्यय प्राधिकरणों द्वारा वहन किया जाएगा
  • विद्युत तंत्र के निर्माण हेतु प्राधिकरणों द्वारा आवश्यक भूमि निःशुल्क उपलब्ध करानी होगी
  • नगरीय क्षेत्रों में भूमि की सीमित उपलब्धता होने के कारण जीआईएस व एचआईएस टेक्नोलाॅजी से होगा निर्माण

लखनऊ |   उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास एवं निवेश आकर्षण हेतु उठाए जा रहे अनेक उपायों की कड़ी में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने उद्योगों एवं अन्य निवेश परियोजनाओं को गुणवत्तापरक व अनवरत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश के औद्योगिक एवं आवासीय विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में उत्तम विद्युत अवस्थापना सुविधाओं की सुचारू स्थापना हेतु निर्माण कार्य एवं व्यय आदि के सम्बंध में जवाबदेही निर्धारित कर दी है।

समस्त अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों एवं सचिवों को प्रेषित शासनादेश में राज्य के आवासीय व औद्योगिक विकास प्राधिकरणों एवं आवास विकास परिषद् इत्यादि द्वारा समय-समय पर विकसित की जाने वाली आवासीय एवं औद्योगिक परियोजनाओं में विद्युत आपूर्ति हेतु आवश्यक विद्युत तंत्र के निर्माण कार्यों की समयबद्ध रूप से पूर्णता सुनिश्चित करने हेतु विभिन्न विद्युत एवं प्राधिकरणीय अधिनियमों व विनियमों के आधार पर निर्माण व्यय के सम्बंध में उत्तरदायित्व का निर्धारण किया गया है।

प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, श्री आलोक कुमार ने बताया कि इस सम्बंध में स्पष्ट व्यवस्था के अभाव में प्राधिकरणों में विद्युत तंत्र के निर्माण के व्यय के भुगतान में विलम्ब होता था, जिसके कारण निर्माण भी समय से पूर्ण नहीं हो पाता था। अतः इस समस्या के समाधान हेतु औद्योगिक विकास, ऊर्जा एवं आवास विभाग द्वारा विचारोपरान्त विकास प्राधिकरणों द्वारा ससमय निर्माण व्यय का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि इस प्रक्रिया के अनुपालन से औद्योगिक एवं आवासीय विकास प्राधिकरणों में समयबद्ध रूप से सुदृढ़ विद्युत अवस्थापना तंत्र स्थापित होने के फलस्वरूप उद्योगों एवं अन्य परियोजनाओं को गुणवत्तापरक व अनवरत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे न केवल विद्यमान उद्योगों को लाभ होगा, अपितु नये निवेशकों को आकर्षित करने के प्रयासों को भी बल मिलेगा।

शासनादेश के अनुसार राज्य के औद्योगिक व आवासीय विकास प्राधिकरणों द्वारा विकसित किए जा रहे क्षेत्र में संभावित विद्युत भार के समरूप निर्धारित 220 किलोवोल्ट (केवी) विभव तक के विद्युत तंत्र के चरणबद्ध निर्माण का व्यय सम्बंधित प्राधिकरण द्वारा वहन किया जाएगा। विद्युत तंत्र के निर्माण हेतु प्राधिकरणों द्वारा आवश्यक भूमि निःशुल्क बिना किसी प्रतिबंध के उपलब्ध करानी होगी।

इसके अतिरिक्त नगरीय क्षेत्रों में भूमि की सीमित उपलब्धता होने के कारण आधुनिक जीआईएस (गैस इन्सुलेटेड सबस्टेशन) व एचआईएस टेक्नोलाॅजी से निर्माण किया जाएगा।

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