
ज्ञातव्य है कि प्रदेश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों को शत-प्रतिशत पाइप पेयजल योजनाओं से अनाच्छादित ग्रामों में पाइप पेयजल योजनाओं के निर्माण हेतु 86 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता का प्रारम्भिक आंकलन किया गया था।
बुन्देलखण्ड और विन्ध्य क्षेत्र की समस्त आबादी तथा आर्सेनिक/फ्लोराइड एवं जापानी इंसेफ्लाइटिस (जे0ई0)/एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिण्ड्रोम (ए0ई0एस0) से ग्रस्त समस्त ग्रामों की चरणबद्ध रूप से शुद्ध पाइप पेयजल परियोजनाओं से आच्छादित किया जाना है। परियोजना के स्कोप आॅफ वर्क और फिजीबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर बुन्देलखण्ड एवं विन्ध्य क्षेत्र के कुल 09 जनपदों में योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु डी0पी0आर0 तैयार कराए जाने हेतु 04 सलाहकार फर्मों का चयन किया गया। सलाहकार फर्मों द्वारा डी0पी0आर0 के विरचन की कार्यवाही कर ली गई है।
योजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित किए जाने के दृष्टिगत थर्ड पार्टी निरीक्षण की व्यवस्था की जाएगी। योजनाओं का 10 वर्षों तक संचालन एवं अनुरक्षण सम्बन्धित कार्यदायी फर्मांे से कराया जाएगा। यूजर चार्जेज के माध्यम से योजना के संचालन एवं अनुरक्षण हेतु आवश्यक धनराशि की व्यवस्था किए जाने का पूर्ण प्रयास किया जाएगा, परन्तु यदि यूजर चार्जेज के माध्यम से प्राप्त होने वाली धनराशि से संचालन एवं अनुरक्षण की लागत व्यय पूर्ण नहीं हो पाएगी, तो शेष धनराशि की व्यवस्था आवश्यकतानुसार बजटीय प्रावधान कराकर की जानी है।
योजना के अन्तर्गत टेण्डर की कार्यवाही राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन से की जानी है। परियोजना के संचालन के निमित्त प्रोजेक्ट मैनेजमेण्ट कंसलटेण्ट (पी0एम0सी0) का चयन खुली प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से किया जाएगा। पी0एम0सी0 के चयन हेतु प्रस्तावित रिक्वेस्ट फाॅर प्रपोजल (आर0एफ0पी0) में संशोधनों को सम्मिलित करते करते हुए पूर्ण आर0एफ0पी0 के ड्राफ्ट को मंत्रिपरिषद ने अनुमोदित कर दिया है। योजना के अन्तर्गत नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग में सृजित पदों के सापेक्ष विभाग के अभियन्ताओं को जलशक्ति विभाग (सिंचाई विभाग) एवं उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा सीधे प्रतिनियुक्ति/सेवा स्थानान्तरण के आधार पर अविलम्ब तैनात किए जाने के प्रस्ताव को भी मंत्रिपरिषद ने मंजूरी प्रदान कर दी।
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मंत्रिपरिषद ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम-2005 की धारा-32 की उप धारा (01) के अन्तर्गत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना, उत्तर प्रदेश में विलम्ब से मजदूरी भुगतान हेतु क्षतिपूर्ति भुगतान की व्यवस्था किए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
इसके लिए ‘उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी (विलम्बित मजदूरी संदाय हेतु प्रतिकर) नियमावली, 2019’ प्रख्यापित की जाएगी। इस नियमावली के अनुसार श्रमिकों को उनके द्वारा किए गए कार्यों के सापेक्ष 15 दिवस के अन्दर मजदूरी का भुगतान किया जाना अनिवार्य है। निर्धारित अवधि में मजदूरी का भुगतान न होने की दशा में जिस स्तर पर विलम्ब हुआ है, उस स्तर पर राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार के उत्तरदायी अधिकारियों के वेतन से प्रतिकर की वसूली की जाएगी।
विलम्बित संदाय के सापेक्ष प्रतिकर का संदाय राज्य रोजगार गारण्टी निधि के प्रतिकर सम्बन्धी बैंक खाते से किया जाएगा। इस खाते से होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति विलम्ब के लिए उत्तरदायी अधिकारियों/कर्मचारियों के वेतन/मानदेय से वसूल की गई धनराशि से की जाएगी। श्रमिकों को विलम्बित प्रतिकर के रूप में मजदूरी दर का 0.05 प्रतिशत प्रतिदिन के आधार पर भुगतान किया जाएगा।
विलम्बित प्रतिकर नियमावली निर्गत होने से योजना के क्रियान्वयन से जुड़ा तंत्र अधिक संवेदनशील एवं उत्तरदायी हो जाएगा, जिससे विलम्बित भुगतान में कमी आएगी और मनरेगा अधिनियम के अनुरूप मनरेगा योजना को प्रदेश में और अधिक सुचारु रूप से संचालित करने में सहायता मिलेगी। जिला कार्यक्रम समन्वयक/जिला मजिस्ट्रेट श्रमिकांे के लिए समय से मजदूरी संदाय किए जाने और विलम्ब की स्थिति में समय से प्रतिकर का संदाय किए जाने के सम्बन्ध में नियमित अनुश्रवण करेंगे।
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उत्तर प्रदेश विधान सभा एवं विधान परिषद का वर्तमान सत्र दिनांक 26 नवम्बर, 2019 को आहूत किया गया था। इस सत्र में विधान सभा एवं विधान परिषद की बैठकें दिनांक 19 दिसम्बर, 2019 के उपवेशन के पश्चात् अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई है। इस सत्र में विधान सभा एवं विधान परिषद के 04-04 उपवेशन हुए।
वर्तमान सत्र में वित्तीय वर्ष 2019-2020 के द्वितीय अनुपूरक अनुदानों की मांगों का विवरण विधान मण्डल में प्रस्तुत किया गया तथा इससे सम्बन्धित विनियोग विधेयक दोनों सदनों से पारित कराया गया। विधान मण्डल का वर्तमान सत्र आहूत किए जाने से पूर्व 02 अध्यादेश प्रख्यापित किए गए थे। इन अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक विधान मण्डल के दोनों सदनों में पारित हो गए थे। विधान मण्डल के वर्तमान सत्र में 03 नए विधेयक विधान सभा में पुरःस्थापित कराए गए, जो दोनों सदनों से पारित हो गए हैं।
इसके दृष्टिगत वर्तमान में विधान मण्डल से कोई कार्य कराया जाना शेष नहीं है। अतः उत्तर प्रदेश विधान सभा एवं विधान परिषद के वर्तमान सत्र का सत्रावसान तात्कालिक प्रभाव से कराए जाने का निर्णय लिया गया है।
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जनपद न्यायालय गोरखपुर परिसर में निर्माणाधीन 24 कोर्टरूम (13$11) के निर्माण हेतु द्वितीय पुनरीक्षित परियोजना प्रस्ताव के सम्बन्ध में दिनांक 09 नवम्बर, 2019 को आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक में समिति द्वारा 6682.36 लाख रुपए (6310.82 लाख रुपए $ 371.54 लाख रुपए जी0एस0टी0) के सापेक्ष वित्त व्यय समिति द्वारा 4842.12 लाख रुपए $ जी0एस0टी0 नियमानुसार वास्तविकता के आधार पर अनुमोदन प्रदान किया गया है।
जनपद न्यायालय गोरखपुर परिसर में निर्माणाधीन 24 कोर्टरूम (13$11) के निर्माण हेतु द्वितीय पुनरीक्षित परियोजना प्रस्ताव में फाॅल्स सीलिंग 156.15 लाख रुपए एवं वाॅल पैनलिंग 213.31 लाख रुपए की उच्च विशिष्टियों की संस्तुति वित्त व्यय समिति द्वारा की गई है।
वित्त व्यय समिति की बैठक दिनांक 09 नवम्बर, 2019 के द्वारा परियोजना की द्वितीय पुनरीक्षित प्रस्तावित लागत 4842.12 लाख रुपए $ जी0एस0टी0 नियमानुसार वास्तविकता के आधार पर आकलित की गई है। इसमें शामिल उच्च विशिष्टियों के अन्तर्गत फाॅल्स सीलिंग 156.15 लाख रुपए एवं वाॅल पैनलिंग 213.31 लाख रुपए पर मंत्रिपरिषद ने मंजूरी प्रदान कर दी है।
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न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, गोमती नगर, लखनऊ में प्रस्तावित 400 बेडेड छात्रावास (200 कक्ष) के निर्माण हेतु परियोजना प्रस्ताव के सम्बन्ध में दिनांक 09 नवम्बर, 2019 को आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक में समिति द्वारा 6228.24 लाख रुपए $ 509.09 लाख रुपए जी0एस0टी0 के सापेक्ष 5482.48 लाख रुपए $ जी0एस0टी0 नियमानुसार वास्तविकता के आधार पर अनुमोदन प्रदान किया गया है।
न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, गोमती नगर, लखनऊ में प्रस्तावित 400 बेडेड छात्रावास (200 कक्ष) की आगणित लागत 5482.48 लाख रुपए $ जी0एस0टी0 नियमानुसार में उच्च विशिष्टियों के अन्तर्गत केन्द्रीय वातानुकूलन (बी0आर0बी0/वी0आर0एफ0 सिस्टम) की धनराशि 371.80 लाख रुपए भी शामिल है।
प्रदेश में न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु एकमात्र संस्थान, न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, गोमती नगर, लखनऊ में स्थित है, जिसमें न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
वित्त व्यय समिति की बैठक दिनांक 09 नवम्बर, 2019 के द्वारा परियोजना की प्रस्तावित लागत 5482.48 लाख रुपए $ जी0एस0टी0 नियमानुसार वास्तविकता के आधार पर आकलित की गई है। इसमें शामिल उच्च विशिष्टियों के अन्तर्गत केन्द्रीय वातानुकूलन (वी0आर0वी0/वी0आर0एफ0 सिस्टम) की धनराशि 371.80 लाख रुपए पर मंत्रिपरिषद ने मंजूरी प्रदान कर दी है।
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ज्ञातव्य है कि श्रम विभाग में सेवायोजन प्रभाग के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश राज्य सेवायोजन अधिकारी सेवा में भर्ती और उसमें नियुक्त कार्मिकों की सेवा की शर्ताें को विनियमित करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सेवायोजन अधिकारी सेवा नियमावली-1980 प्रख्यापित की गयी थी, जिसका प्रथम संशोधन उत्तर प्रदेश राज्य सेवायोजन (प्रथम संशोधन) सेवा नियमावली-1993 तथा उत्तर प्रदेश सहायक सेवायोजन अधिकारी सेवा नियमावली, 1994 प्रख्यापित हुई। वेतन समिति 2008 के दसवें प्रतिवेदन भाग-3 में श्रम विभाग के सम्बन्ध में की गयी संस्तुतियों पर लिये गये निर्णयों के कार्यान्वयन हेतु वित्त (वेतन आयोग) अनुभाग-2 के शासनादेश संख्या वे0आ0-2-1120/दस-54(एम0)/2008-
पूर्व में प्रख्यापित नियमावली-1980 के भाग-3 भर्ती के स्रोत (पदनाम) में 93 प्रतिशत पद सीधी भर्ती द्वारा लोक सेवा आयोग के माध्यम से तथा 06 प्रतिशत व 01 प्रतिशत क्रमशः मुख्यालय व क्षेत्रीय कार्यालयों के लिपिकीय संवर्ग से आयोग के माध्यम से पदोन्नति द्वारा भरे जाने की व्यवस्था को वित्त विभाग के परामर्श के क्रम में परिवर्तित करते हुए 93 प्रतिशत लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा तथा शेष 07 प्रतिशत अर्थात 11 पदों में से 06 पद मुख्यालय एवं 05 पद क्षेत्रीय कार्यालयों के 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले लिपिकीय संवर्ग के कार्मिकों से आयोग के माध्यम से पदोन्नति द्वारा भरे जाने की व्यवस्था की जा रही है। पूर्व में निर्गत सेवा नियमावली-1980 के भाग-3 के प्रस्तर-3 में सहायक निदेशक के पद पर भर्ती हेतु लोक सेवा आयोग के माध्यम से पोषक पद जिला रोजगार सहायता अधिकारी के पद से श्रेष्ठता आधारित पदोन्नति के माध्यम से चयन कराये जाने की स्थापित व्यवस्था को वर्तमान में विद्यमान कार्मिक नियमों के अनुसार परिवर्तित करते हुए शासन स्तर पर गठित चयन समिति के माध्यम से अनुपयुक्त को अस्वीकार करते हुए ज्येष्ठता के आधार पर पदोन्नति द्वारा भर्ती किये जाने की भी व्यवस्था की जा रही है।
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